परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की दावेदारी का हंगरी ने भी समर्थन किया है। मंगलवार को उसने कहा कि एनएसजी में भारत के शामिल होने से परमाणु अप्रसार को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक परमाणु कारोबार ज्यादा सुरक्षित होगा।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की अपने हंगरी के समकक्ष पीटर सिजार्तो के साथ लंबी वार्ता के बाद इस संबंध में संयुक्त बयान जारी किया गया। इस बीच दोनों पक्ष व्यापार, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में आपसी संबंधों को मजबूत बनाने पर सहमति हुए। वहीं, मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) और एनएसजी में भारत की सदस्यता का समर्थन करने के लिए विदेश मंत्री ने हंगरी का शुक्रिया किया।
संयुक्त बयान में दोनों मंत्रियों ने कहा कि उनके साझा हित वैश्विक अप्रसार के लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करेंगे। वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन से निपटने समेत तमाम वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए।
आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए सुषमा और पीटर ने इसके सभी रूपों की कड़ी निंदा की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय के मसौदे को जल्द से जल्द स्वीकार करने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने ब्रेग्जिट के मद्देनजर भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार के पहलुओं पर चर्चा की।