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आजादी के बाद से नक्शे में कितना बदला भारत, सीमाओं में आए क्या-क्या बदलाव, जानें सात दशक का सफर

Tue, 11 Aug 2020 12:48 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Indian Map - फोटो : Amar Ujala
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15 अगस्त, 1947। यही वो दिन था, जिस दिन हमें अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली। हालांकि अंग्रेजों ने जाते-जाते मुल्क के दो टुकड़े कर उसे भारत और पाकिस्तान में बांट दिया। भारत के नक्शे और उसकी सीमाओं की बात करें तो सात दशक के सफर में काफी कुछ बदला है। समय के साथ लगातार इसमें बदलाव आते रहे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय सीमा की बात करें तो भारतीय मानचित्र में बहुत बदलाव नहीं आया, लेकिन देश के भीतर राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन की प्रक्रिया आजादी के बाद से ही चलती रही।

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जरूरत और मांग के हिसाब से नए-नए राज्यों का गठन होता रहा। हाल ही में जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग कर उन्हें केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। वर्तमान में देश में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। आइए जानते हैं आजादी के बाद से इस लंबे सफर में भारतीय नक्शे की रूपरेखा कैसे बदलती रही। 

देश की बाहरी सीमा में आए ये तीन बड़े बदलाव 

  • साल 1947 के बाद से भारत की बाहरी सीमा की बात करें तो उसमें कम ही बदलाव आए। हालांकि इस दौरान पीओके में पाकिस्तान और 1962 में चीन की साजिश का दंश भी हमें झेलना पड़ा। आजादी के बाद से अब तक बाहरी सीमा में तीन बड़े बदलाव आए। 
  • 1961 में गोवा को भारत में शामिल किया गया। 19 दिसंबर, 1961 को भारतीय सेना ने इस क्षेत्र को मुक्त करवाया और गोवा भारत में शामिल हुआ।  
  • इसके एक साल बाद ही पोंडिचेरी अब पुडुचेरी आधिकारिक रूप से भारत में शामिल हुआ। 
  • आजादी मिलने के कई साल बाद भी सिक्किम भारत का हिस्सा नहीं था। 1975 में वह भारत में शामिल हुआ। 1947 में हुई संधि के मुताबिक सिक्किम की आजादी बरकरार रखी गई थी। 
  • मगर सिक्किम में व्यापक आंदोलन के बाद 16 मई 1975 को उसे भारत के 22वें राज्य के तौर पर शामिल किया गया।  
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इन रियासतों ने शुरुआत में किया विरोध 

आजाद भारत
  • आजादी मिलने के वक्त ऐसी भी कई रियासत रहीं, जो या तो पाकिस्तान के साथ विलय चाहती थी या फिर अपना स्वायत्त शासन चाहती थी। मगर भौगोलिक दृष्टि से यह संभव नहीं था। 
  • कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़, मणिपुर और त्रिपुरा ऐसी ही कुछ रियासतें थीं। सरकार की ओर से लगातार प्रयासों के बाद 1947 से 1949 के बीच इन्हें भारत में शामिल किया गया। 
  • 26 जनवरी 1950 को भारत औपचारिक रूप से एक गणतंत्र के रूप में परिवर्तित हुआ और भारत का अपना संविधान लागू हुआ। 
  • इस समय भारत छोटे-छोटे राज्यों की जगह क्षेत्रीय सीमाओं में रेखांकित था। जैसे सौराष्ट्र। यह मुख्य रूप से पुरानी रियासतों पर आधारित प्रणाली ही थी। 
साल 1956 में देश में थे इतने राज्य 
  • भाषा के आधार पर अलग राज्य की मांग सबसे पहले मद्रास स्टेट में उठी। 1953 में आंध्र स्टेट ने तेलुगु भाषियों के अलग अलग राज्य की मांग की। इसके बाद राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया। 
  • 1956 में देश में 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश थे। देश में सबसे ज्यादा बदलाव इसी दौरान देखने को मिले। छह राज्य और पांच केंद्र शासित प्रदेश अभी भी अपनी सीमाओं को बरकरार रखने में सफल रही हैं। 

भाषा के आधार पर नए राज्य गठित 

independence day - फोटो : a
  • रोचक बात यह है कि पुनर्गठन आयोग ने भाषा के आधार पर राज्यों का गठन नहीं करने की सिफारिश की थी। मगर आंदोलनों के चलते इस सिफारिश को नहीं माना गया। 
  • समयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन और महागुजरात आंदोलन के चलते 1960 में बॉम्बे स्टेट का बंटवारा हुआ और इस तरह से महाराष्ट्र और गुजरात का जन्म हुआ।  
  • इसी तरह अकाली दल ने पंजाबी सूबा आंदोलन चलाया, जिसकी वजह से पंजाबी बोलने वाले लोगों के लिए अलग राज्य बनाया गया। हिंदी बोलने और हिंदू बहुलता वाले क्षेत्र को हरियाणा का नाम दिया गया। 
  • पंजाब राज्य में हिमाचल प्रदेश को भी शामिल किया गया। हालांकि बाद में हिमाचल प्रदेश को भी अलग राज्य का दर्जा मिला। 
70 और 80 के दशक में पूर्वोत्तर में हुआ बदलाव 
  • पूर्वोत्तर के कई राज्यों में उग्रवादियों की लगातार बढ़ती हिंसा के चलते केंद्र सरकार ने बड़े फैसले लिए। 
  • मणिपुर और त्रिपुरा को अलग राज्य का दर्जा मिला। जबकि मेघालय और मिजोरम को भी 1972 में असम से अलग किया गया। 
  • इसके तीन साल बाद 1975 में सिक्किम का भी स्वायत्त शासन खत्म हुआ और वह भारत का हिस्सा बना। 
  • अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर को 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। इससे पहले ये केंद्र शासित प्रदेश थे। 
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इस तरह बने ये केंद्र शासित प्रदेश और राज्य 

जम्मू-कश्मीर से अलग हुआ लद्दाख - फोटो : अमर उजाला
  • 1987 में ही गोवा, दमन व दीव को अलग किया गया। दमन व दीव को गोवा से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला। 
  • 2000 के दशक की शुरुआत में उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ का जन्म हुआ। उत्तराखंड को यूपी से, झारखंड को बिहार से और छत्तीसगढ़ को मध्य प्रदेश से अलग किया गया। 
  • लंबे आंदोलन के बाद साल 2014 में आखिरकार आंध्र प्रदेश से अलग होकर अलग तेलंगाना राज्य का गठन हुआ। 
  • 2019 में जम्मू व कश्मीर को अलग कर दो केंद्र शासित प्रदेशों का गठन हुआ। जम्मू कश्मीर के अलावा लद्दाख को भी केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया। 
भविष्य में दिख सकते हैं ये राज्य 
  • आजादी के 73 साल बाद भी कई क्षेत्रों से अलग राज्य की मांग लगातार उठती जा रही है। 
  • लद्दाख में कारगिल को अलग करने की मांग उठ रही है जबकि गुजरात से कच्छ और सौराष्ट्र अलग होने की मांग कर रहे हैं। 
  • महाराष्ट्र में विदर्भ और मराठवाड़ा भी लगातार अलग राज्य की मांग कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में गोरखालैंड को लेकर अक्सर विरोध होते रहते हैं। 

 
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