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Assam: CM सरमा बोले- उल्फा के बागी गुट के प्रमुख के संपर्क में, लेकिन निकट भविष्य में बातचीत की संभावना नहीं

Mon, 01 Jan 2024 08:17 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

Assam: मुख्यमंत्री ने कहा कि परेश बरुआ के लिए संप्रभुता के मुद्दे को छोड़ना आसान नहीं है। लेकिन, उन्हें यह समझना चाहिए कि असम के लोग अब ऐसा नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'वह राज्य के लोगों के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन लोग विकास चाहते हैं न कि स्वतंत्र असम।'
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हिमंत बिस्व सरमा - फोटो : एएनआई (फाइल)
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को कहा कि वह वार्ता विरोधी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) गुट का नेतृत्व करने वाले परेश बरुआ के संपर्क में हैं। लेकिन, निकट भविष्य में संगठन के साथ बातचीत की संभावना नहीं है। 

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उन्होंने कहा, 'राज्य के राजनीतिक प्रमुख के रूप में उनसे संपर्क करना जारी रखूंगा। मैं आमतौर पर हर तीन या छह महीने में उनसे बात करता हूं। मैं जल्द ही उनसे फिर से बात करने की योजना बना रहा हूं। लेकिन, मुझे उम्मीद नहीं है कि वह तुरंत बातचीत के लिए आएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बरुआ के लिए संप्रभुता के मुद्दे को छोड़ना आसान नहीं है। लेकिन, उन्हें यह समझना चाहिए कि असम के लोग अब ऐसा नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'वह राज्य के लोगों के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन लोग विकास चाहते हैं न कि स्वतंत्र असम।'

उन्होंने कहा, उल्फा का मांगपत्र कई दशक पहले तैयार किया गया था और अगर बरुआ आते हैं और 15 दिनों के लिए राज्य में रहते हैं, तो वह मांगों को भी बदल देंगे क्योंकि असम अब शांति की भूमि है। उन्होंने कहा, 'हमने चर्चा के लिए रास्ते खुले रखे हैं। लेकिन, हमें निकट भविष्य में बातचीत होती नहीं दिख रही है। यह एक लंबी प्रक्रिया है जो जारी रहेगी।'

उल्फा के वार्ता समर्थक धड़े के साथ हाल ही में हुए त्रिपक्षीय समझौते पर सरमा ने कहा कि समझौते ने एक झटके में राज्य के मूल निवासियों के राजनीतिक और भूमि अधिकारों को स्थापित किया है, जिन्हें आने वाले लंबे समय तक बाधित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'वार्ता समर्थक धड़े के नेता पिछले 14 साल से सार्वजनिक जीवन में नहीं थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शांति प्रक्रिया को सक्रिय किया। यह समझौता असम के लोगों के भविष्य को सुरक्षित करने का एक साधन है।'

उन्होंने कहा, 'राज्य में परिसीमन की कवायद ने यह सुनिश्चित किया था कि ब्रह्मपुत्र घाटी में 96 और बराक घाटी में नौ विधानसभा क्षेत्रों को मूल निवासियों के लिए सुरक्षित किया जाएगा। जबकि, उल्फा समझौते ने यह सुनिश्चित किया है कि इस परिसीमन अभ्यास में अपनाए गए सिद्धांत का पालन केंद्र द्वारा देशभर में किए जाने वाले अगले परिसीमन अभ्यास में भी किया जाएगा।'
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उन्होंने कहा कि इसके अलावा, समझौते के अनुसार कोई भी सरकारी या वन भूमि पर अतिक्रमण नहीं कर सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'एक मतदाता अपना निर्वाचन क्षेत्र नहीं बदल सकता। उनके मतदान के अधिकार रद्द नहीं किए जाएंगे। लेकिन उन्हें मूल निर्वाचन क्षेत्र में बनाए रखा जाएगा।'
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