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सरकार के हाथों में नहीं जाने देंगे ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर: भागवत

Sun, 17 Apr 2016 04:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वृंदावन

सार

  • अधिग्रहण मुद्दे पर सेवायतों के साथ है आरएसएस
  • भागवत ने बांकेबिहारी मंदिर और निधिवनराज के किए दर्शन
  • वृंदावन को तीर्थ स्थल घोषित कराने की रखी मांग
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मोहन भागवत - फोटो : amar ujala bureau
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विस्तार
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दो दिन के प्रवास पर वृंदावन आए आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को सुबह ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन किए। मंदिर सेवायतों ने संघ प्रमुख को प्रदेश सरकार के बांकेबिहारी मंदिर अधिग्रहण प्रस्ताव की जानकारी दी। सेवायतों ने इसे हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ बताया और उनसे अपना मत स्पष्ट करने का आग्रह किया। इस पर संघ प्रमुख ने सेवायतों से कहा कि हम आपके साथ हैं।
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मोहन भागवत शनिवार को सुबह आठ बजे स्वामी हरिदासजी की साधनास्थली और ठाकुर बांकेबिहारी की प्राकट्य स्थली निधिवन राज पहुंचे थे। यहां नगर संघचालक दास बिहारी अग्रवाल ने उन्हें निधिवनराज की पवित्रता और ठाकुर बांकेबिहारी के प्राकट्य की कथा बताई। इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के लिए गए। मंदिर में मोहन भागवत ने पूजा अर्चना की और राधे-राधे के जयकारों के साथ ठाकुरजी से विश्वशांति की कामना की।

इस दौरान सेवायतों ने प्रदेश की सपा सरकार के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर अधिग्रहण प्रस्ताव की जानकारी संघ प्रमुख को दी। श्रीबांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के उपाध्यक्ष घनश्याम गोस्वामी और सदस्य रजत गोस्वामी ने कहा कि इस मुद्दे पर हम सेवायतों ने आपसे कई बार मिलने का प्रयास किया लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।
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सेवायतों ने इस मुद्दे पर संघ प्रमुख का मत भी पूछा तो मोहन भागवत ने कहा कि वे सेवायतों के साथ हैं। हिंदुओं की आस्था से जुड़े बांकेबिहारी मंदिर को सरकार के हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा। इस दौरान संघ के पदाधिकारी और स्थानीय स्वयंसेवक भी साथ थे। सेवायत रजत गोस्वामी और घनश्याम गोस्वामी ने संघ प्रमुख को पूजन कराया।
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संघ प्रमुख को संतों ने दिलाई यमुना शुद्धीकरण की याद

संघ प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत का वृंदावन के प्रमुख संतों और धर्माचायों से मुलाकात का क्रम शनिवार को भी जारी रहा। इस दौरान संतों ने संघ प्रमुख को राष्ट्रीयता, गोरक्षा, वृंदावन को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग और यमुना-गंगा शुद्धीकरण के लिए प्रतिबद्धता याद दिलाई। साथ ही केंद्र सरकार की अब तक की कार्ययोजना पर सवाल भी खड़े किए।

शनिवार को सुबह मोहन भावगत रामकथा प्रवक्ता संत विजय कौशल महाराज के निकुंजवन स्थित आश्रम पर पहुंचे थे। यहां एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा हुई। संघ प्रमुख ने पत्रकार वार्ता में चर्चा के प्रश्नों को हंसकर टाल दिया लेकिन विजय कौशल महाराज ने धार्मिक मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख को यमुना की वर्तमान दशा से अवगत कराते हुए यमुना और गंगा शुद्धीकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता याद दिलाई गई।
इसके बाद संघ प्रमुख ने परिक्रमा मार्ग स्थित टटिया स्थान में संत राधाबिहारी महाराज से भेंट की।

संत राधाबिहारी ने भागवत को बताया कि वृंदावन में संप्रदाय भले ही अलग-अलग हों, लेकिन उपासना एक है। यमुना शुद्धीकरण के लिए केंद्र सरकार से वार्ता करने का आग्रह भी किया। यहां से संघ प्रमुख सुदामाकुटी पहुंचे। यहां महंत भगवानदास महाराज और महंत सुतीक्षणदास महाराज से भेंट की। सुदामाकुटी में आयोजित बैठक में संघ प्रमुख ने संतों और धर्माचार्यों से कथा प्रवचनों के माध्यम से राष्ट्रवादी विचारधारा, भारतीय दर्शन, सनातन संस्कृति के साथ ही हिंदुत्व की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

महंत भगवानदास महाराज ने भागवत को यमुना शुद्धीकरण आंदोलन की याद दिलाई। वृंदावन को तीर्थ स्थल घोषित कराने के लिए केंद्र सरकार से वार्ता करने पर जोर दिया। संघ प्रमुख ने भी यमुना शुद्धीकरण के संकल्प को जल्द पूरा करने का वादा किया। बैठक में राधा रमण मंदिर के सेवायत पद्नाभ गोस्वामी, विहिप नगर अध्यक्ष सौरभ गौड़, बांके लाल शर्मा उपस्थित रहे।
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