फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईसीएमआर का दावा: खतरनाक है कोरोना का डेल्टा वैरिएंट, वैक्सीन की दोनों खुराक लेने वालों को भी कर रहा संक्रमित

Thu, 19 Aug 2021 10:39 AM IST
प्रशांत कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोरोना संक्रमण के डेल्टा वैरिएंट ने विशेषज्ञों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है।  कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट इतना खतरनाक है कि वैक्सीन लेने वालों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। कई राज्यों में इस वैरिएंट के मरीज निकल रहे हैं। 
विज्ञापन
कोरोना वायरस- सांकेतिक - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत में कोरोना की दूसरी लहर के बीच तीसरी लहर के आसार को लेकर लोग भयभीत हैं। कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट डेल्टा ने विशेषज्ञों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। कोरोना का डेल्टा वैरिएंट इतना खतरनाक है कि वैक्सीन लेने वालों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से चेन्नई में की गई स्टडी में पाया गया है कि कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट वैक्सीन लेने वाले लोगों को भी संक्रमित करता है। 

विज्ञापन



चेन्नई में 17 अगस्त को आईसीएमआर की एक स्टडी में यह दावा किया गया है। स्टडी में बताया गया है कि डेल्टा वैरिएंट देश के लिए खतरा पैदा कर रहा है। वैरिएंट इतना खतरनाक है कि टीका लेने वाले लोगों को भी नहीं छोड़ रहा है।इसके अलावा जो लोग पहले संक्रमित नहीं हुए है यह वेरिएंट उन्हें भी संक्रमित करने की क्षमता रखता है। इस अध्ययन को ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी और चेन्नई द्वारा अनुमोदित किया गया था । 

डेल्टा वैरिएंट ने बढ़ाई चिंता
अध्ययन में इसका खुलासा हुआ कि डेल्टा वैरिएंट या बी.1.617.2 की व्यापकता टीकाकरण और बिना टीकाकरण वाले समूहों के बीच कोई अंतर नहीं समझ पा रहा है। दोनों तरह के लोगों पर इस वैरिएंट का काफी असर दिख रहा है। कोरोना वायरस के डेल्ट वैरिएंट को लेकर पूरी दुनिया परेशान है। देश के कई हिस्सों में डेल्टा वैरिएंट मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। कोरोना के इस वैरिएंट से शासन, प्रशासन खुद ही परेशान है। महाराष्ट्र, केरल समेत कुछ राज्यों में इस वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र में डेल्टा प्लस वैरिएंट के कई मामले सामने आ चुके हैं।  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के एक वैज्ञानिक जेरोमी थंगराज ने बताया कि स्टडी के दौरान पाया गया कि टीकाकरण के बाद भी लोग संक्रमित थे। उन्होंने कहा कि तीन आंशिक रूप से टीका लगाए गए (मरीजों) और सात गैर-टीकाकरण वाले रोगियों की मौत हो गई।बता दें कि दूसरी लहर के दौरान चेन्नई सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ था, इसी साल मई के पहले तीन हफ्तों के दौरान प्रतिदिन लगभग 6000 मामले दर्ज किए गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें