रक्षा अधिकारियों ने कहा, भारतीय वायुसेना ने अभ्यास में पूर्वोत्तर क्षेत्र में एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम, राफेल और तेजस लड़ाकू विमानों के साथ प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर्स सहित प्रमुख प्लेटफॉर्म का संचालन किया गया।
पूर्वी वायु कमान (ईएसी) ने 30 अक्तूबर से चार नवंबर तक 'पूर्वी आकाश' कोडनेम के साथ युद्धाभ्यास किया। प्रमुख अभ्यास में विशेष रूप से भारतीय वायु सेना और पूर्वी वायु कमान की परिचालन तत्परता क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।
पूर्वी वायु कमान (ईएसी) भारतीय वायु सेना पांच परिचालन कमानों में से एक है जो तीन लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक के विशाल क्षेत्र में हवाई संचालन को नियंत्रित करता है जो पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों सहित 12 राज्यों में फैला हुआ है।
अधिकारियों ने कहा, अभ्यास 'पूर्वी आकाश' का मकसद रक्षात्मक और आक्रामक अभियानों और विभिन्न खतरों के प्रति प्रतिक्रियाओं सहित अपनी सभी भूमिकाओं में वायु शक्ति का इस्तेमाल करना था और इसे दिन और रात में आयोजित किया गया था।'
इसका उद्देश्य भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना द्वारा संयुक्त रूप से किए गए अभियानों के तालमेल को बेहतर बनाना भी था। इस अभ्यास में पूर्वी क्षेत्र के चुनौतीपूर्ण और विविध इलाकों में भारतीय सेना की पूर्वी कमान (ईसी) के साथ संयुक्त अभियान शामिल था और इसमें पूरे पूर्वी सेक्टर को सक्रिय करना शामिल था।
गरुड़ विशेष बलों ने भी भारतीय सेना के विशेष बलों (एसएफ) के साथ विशेष मिशनों में भाग लिया। दोनों सेनाओं द्वारा संयुक्त रूप से किए गए अभियानों की रेंज पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों ने कहा, "वास्तविक युद्ध परिदृश्यों का अनुकरण करने के लिए दोनों सेवाओं की वायु रक्षा परिसंपत्तियों को भी तैनात किया गया था।'