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क्या कोरोना के लक्षण ना होने पर भी संक्रमण फैला सकता है कोविड-19 मरीज?

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Fri, 24 Apr 2020 02:05 PM IST
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लोगों की जांच करते स्वास्थ्य कर्मचारी - फोटो : PTI

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने दो ऐसे मामलों की जानकारी दी है जिनमें बिना किसी लक्षण के कोरोना संक्रमण पाया गया है। डॉक्टरों में अब गैर संदिग्ध व्यक्तियों के भी बीमार पड़ने की संभावना का डर पैदा कर दिया है। ऐसे लोग दूसरे लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं। 

आईसीएमआर का क्या कहना है?
आईसीएमआर प्रमुख डॉ गंगाखेड़कर ने बताया कि 80 फीसद मरीजों में बिना किसी लक्षण के कोरोना पॉजिटिव पाया जाएगा। आस-पास कई ऐसे लोग मौजूद हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं हैं लेकिन टेस्ट करने पर उनमें कोरोना पाया जा सकता है। मरीज में लक्षण होने पर ही आरटी-पीसीआर टेस्ट पॉजिटिव आता है।



लोगों में लक्षण पैदा होने में समय लगता है। अगर किसी मरीज का टेस्ट तब किया जाए जब उसमें कोरोना के लक्षण नहीं बने हैं तो टेस्ट के पॉजिटिव आने की संभावना कम रहती है। उन्होंने कहा कि टेस्ट करने की भी एक सीमा तय है। देश में जिन लोगों में लक्षण दिख रहे हैं सिर्फ उन्हीं का टेस्ट किया जा रहा है। 

डॉ गंगाखेड़कर ने साफ कहा कि देश में कोरोना संक्रमित मामलों के 69 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखा था। उन्होंने कहा कि बिना लक्षण के 80 फीसद मरीजों में कोरोना होने वाली बात एक शोध के आधार पर कही गई थी।

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लोगों की जांच करते स्वास्थ्य कर्मचारी - फोटो : PTI
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने दो ऐसे मामलों की जानकारी दी है जिनमें बिना किसी लक्षण के कोरोना संक्रमण पाया गया है। डॉक्टरों में अब गैर संदिग्ध व्यक्तियों के भी बीमार पड़ने की संभावना का डर पैदा कर दिया है। ऐसे लोग दूसरे लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं। 

आईसीएमआर का क्या कहना है?
आईसीएमआर प्रमुख डॉ गंगाखेड़कर ने बताया कि 80 फीसद मरीजों में बिना किसी लक्षण के कोरोना पॉजिटिव पाया जाएगा। आस-पास कई ऐसे लोग मौजूद हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं हैं लेकिन टेस्ट करने पर उनमें कोरोना पाया जा सकता है। मरीज में लक्षण होने पर ही आरटी-पीसीआर टेस्ट पॉजिटिव आता है।

लोगों में लक्षण पैदा होने में समय लगता है। अगर किसी मरीज का टेस्ट तब किया जाए जब उसमें कोरोना के लक्षण नहीं बने हैं तो टेस्ट के पॉजिटिव आने की संभावना कम रहती है। उन्होंने कहा कि टेस्ट करने की भी एक सीमा तय है। देश में जिन लोगों में लक्षण दिख रहे हैं सिर्फ उन्हीं का टेस्ट किया जा रहा है। 

डॉ गंगाखेड़कर ने साफ कहा कि देश में कोरोना संक्रमित मामलों के 69 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखा था। उन्होंने कहा कि बिना लक्षण के 80 फीसद मरीजों में कोरोना होने वाली बात एक शोध के आधार पर कही गई थी।

ऐसे मामलों का कोई सबूत है?

आईसीएमआर के ताजा अध्ययन के मुताबिक भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों में 83 फीसदी पुरुष हैं। - फोटो : PTI
दुनिया में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं देखे गए हैं लेकिन टेस्ट पॉजिटिव आया है। जब तक उनके शरीर में एंटीबॉडी के लक्षण ना दिखे तब तक उन्हें खुद के महामारी से संक्रमित होने का कोई सबूत नहीं मिला है। 

पिछले हफ्ते चीन की ओर से जारी एक शोध में जानकारी दी गई कि अब तक 44 फीसद मामले ऐसे हैं जो किसी बिना लक्षण वाले व्यक्ति के संपर्क में आने पर कोरोना से संक्रमित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि लक्षणों के शुरुआती समय में गले में सबसे ज्यादा असर दिखाई पड़ता है, नतीजतन लक्षणों के सामने आने तक संक्रमण फैलना शुरू कर देता है। 

क्या है प्रीसिम्पटोमैटिक (लक्षण दिखने से पहले की स्थिति) स्टेज?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 संक्रमण की तीन स्थिति बताई हैं, पहला एसिम्पटोमैटिक (बिना लक्षण के), प्रीसिम्पटोमैटिक (लक्षण दिखने से पहले वाली स्थिति) और सिम्पटोमैटिक (लक्षण दिखाई देने वाली स्थिति)। 

सिम्पटोमैटिक स्थिति में मरीज लक्षणों के दिखाई देने पर दूसरे व्यक्तियों के संपर्क में आकर उन्हें संक्रमित कर देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के डाटा के मुताबिक कोरोना की शुरुआत में सिम्पटोमैटिक मरीज ही बीमारी फैला रहे थे। मरीज में लक्षण दिखने में 5-14 दिन का समय लगता था। 

प्रीसिम्पटोमैटिक वह स्थिति है जहां मरीज लक्षण दिखाई देने से पहले ही दूसरे को संक्रमित कर देता है और जिसके बाद मरीज में लक्षण दिखाई देने लगते हैं। वहीं एसिम्पटोमैटिक (गैर संक्रमित) स्थिति में वायरस ऐसे व्यक्ति से फैलता है जिसमें लक्षण होते ही नहीं हैं। कुछ देशों में एसिम्पटोमैटिक (बिना लक्षण के) मामलों को कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

सेंटर्स और डिसीज कंट्रोल और प्रीवेंशन (सीडीसी) ने भी साफ किया है कि वायरस के एसिम्पटोमैटिक (बिना लक्षण के) और प्रीसिम्पटोमैटिक (लक्षण दिखने से पहले वाली स्थिति) होने की संभावना है। लेकिन इन दोनों स्थितियों में लक्षणों के बनने और संक्रमण के फैलने की अवधि की जानकारी नहीं है।

एसिम्पटोमैटिक संक्रमण के खुद को कैसे बचाएं?

सोशल डिस्टेंसिंग करते लोग - फोटो : PTI
साफ-सफाई के आधारभूत नियमों के अलावा बचाव के दूसरे अन्य उपाय नहीं हैं। एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि हाथ धोने, सोशल डिस्टेंसिंग रखने और मास्क पहनने के अलावा किसी दूसरे तरीके से खुद को नहीं बचाया जा सकता। जब तक वैक्सीन नहीं बन जाती तब तक इन्हीं उपायों को करना होगा। 

पूरी दुनिया में हाथ धोने, मास्क पहनने और लोगों से उचित दूरी बनाए रखने के लिए अपील की जा रही है, जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भी है। डॉ. गुलेरिया ने बताया कि हमारे देश में लोगों को बुखार या शरीर में दर्द हो लेकिन कोविड-19 होने का पता भी ना चले। 

यह सवाल जरूरी है कि किसी में लक्षण ना होने पर भी संक्रमण कैसे और क्यों फैल रहा है? हालांकि जिन मरीजों में कोई लक्षण नहीं है उनके संक्रमण फैलाने के सबूत अलग-अलग हैं। कहीं ना कहीं इसे स्वीकार किया जा सकता है कि लक्षण दिखने से पहले कुछ मरीज महामारी फैला सकते हैं।

संक्रमित होने के बाद बीमारी फैलने में कितना समय लगता है?

मास्क पहनना अनिवार्य - फोटो : PTI
संक्रमित व्यक्ति में लक्षण दिखने में कम से कम 14 दिन का समय लगता है। केरल में एक मामला ऐसा भी सामने आया है जिसमें 54 वर्षीय महिला में उसके विदेश से लौटने के एक महीने बाद लक्षण देखे गए और जांच करने पर परिणाम पॉजिटिव सामने आया। 

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक एक दर्जन ऐसे मामले हैं जिन्हें 28 दिन तक क्वारंटीन किया गया और उसके बाद भी उन लोगों में कोरोना पॉजिटिव पाया गया। गुरुवार को तेलंगाना ने क्वारंटीन की अवधि को 14 दिन से बढ़ाकर 28 दिन करने का फैसला किया गया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय शुरुआत से ही क्वारंटीन की अवधि 28 दिन करने के पक्ष में रहा है।
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