केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर में तीन दिन की यात्रा पर पहुंच गए हैं। आतंकी घटनाओं के बढ़ने के बीच उनकी कश्मीर यात्रा नरेंद्र मोदी सरकार के आउटरीच कार्यक्रम के हिस्से के रूप में हो रही है, जिसके तहत बारी-बारी से 70 केंद्रीय मंत्रियो के जम्मू-कश्मीर पहुंचने का कार्यक्रम चल रहा है।
पांच अगस्त 2019 को जब जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के समाप्ति के बाद गृह मंत्री की यह पहली जम्मू- कश्मीर यात्रा है। जबकि केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में, अमित शाह की यह दूसरी यात्रा है। उन्होंने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने से ठीक 40 दिनों पहले जून 2019 में कश्मीर घाटी का दौरा किया था।
अमित शाह के एजेंडे में अब क्या है?
अमित शाह की कश्मीर यात्रा जून के बाद से जम्मू और कश्मीर से संबंधित दूसरी सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक घटना है, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित राजनीतिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को नई दिल्ली में आमंत्रित किया था।
इसके बाद, मोदी सरकार के कई मंत्रियों ने आउटरीच कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। सितंबर में, अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि आंतकी घटना के बीच भी गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि नए जम्मू-कश्मीर का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता में है और आतंकी घटनाएं सरकार के इरादे नहीं बदल सकती है और ना ही सरकार का रास्ता रोक सकती है। बल्कि सरकार आतंकवादी घटनाओं और आतंकियों के साथ सहानुभूति रखने वालों के साथ भी सख्ती से निबटने की रणनीति पर चर्चा करने वाली है।