फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Amit Shah in Jammu Kashmir: अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के गृह मंत्री की पहली कश्मीर यात्रा, क्या वहां चुनाव होने वाले हैं?

प्रतिभा ज्योति
Updated Sat, 23 Oct 2021 02:00 PM IST

सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद पहली बार कश्मीर घाटी का दौरा कर रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इस बात की अटकलें लग रही हैं क्या अगले साल की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर में भी चुनाव होने वाले हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू में अमित शाह - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर में तीन दिन की यात्रा पर पहुंच गए हैं। आतंकी घटनाओं के बढ़ने के बीच उनकी कश्मीर यात्रा नरेंद्र मोदी सरकार के आउटरीच कार्यक्रम के हिस्से के रूप में हो रही है, जिसके तहत बारी-बारी से 70 केंद्रीय मंत्रियो के जम्मू-कश्मीर पहुंचने का कार्यक्रम चल रहा है। 

पांच अगस्त 2019 को जब जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के समाप्ति के बाद गृह मंत्री की यह पहली जम्मू- कश्मीर यात्रा है। जबकि केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में, अमित शाह की यह दूसरी यात्रा है। उन्होंने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने से ठीक 40 दिनों पहले जून 2019 में कश्मीर घाटी का दौरा किया था।  


अमित शाह के एजेंडे में अब क्या है?
अमित शाह की कश्मीर यात्रा जून के बाद से जम्मू और कश्मीर से संबंधित दूसरी सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक घटना है, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित राजनीतिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को नई दिल्ली में आमंत्रित किया था।

इसके बाद, मोदी सरकार के कई मंत्रियों ने आउटरीच कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। सितंबर में, अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि आंतकी घटना के बीच भी गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि नए जम्मू-कश्मीर का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता में है और आतंकी घटनाएं सरकार के इरादे नहीं बदल सकती है और ना ही सरकार का रास्ता रोक सकती है। बल्कि सरकार आतंकवादी घटनाओं और आतंकियों के साथ सहानुभूति रखने वालों के साथ भी सख्ती से निबटने की रणनीति पर चर्चा करने वाली है।
 
विज्ञापन

जम्मू में अमित शाह - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर में तीन दिन की यात्रा पर पहुंच गए हैं। आतंकी घटनाओं के बढ़ने के बीच उनकी कश्मीर यात्रा नरेंद्र मोदी सरकार के आउटरीच कार्यक्रम के हिस्से के रूप में हो रही है, जिसके तहत बारी-बारी से 70 केंद्रीय मंत्रियो के जम्मू-कश्मीर पहुंचने का कार्यक्रम चल रहा है। 

पांच अगस्त 2019 को जब जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के समाप्ति के बाद गृह मंत्री की यह पहली जम्मू- कश्मीर यात्रा है। जबकि केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में, अमित शाह की यह दूसरी यात्रा है। उन्होंने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने से ठीक 40 दिनों पहले जून 2019 में कश्मीर घाटी का दौरा किया था।  

अमित शाह के एजेंडे में अब क्या है?
अमित शाह की कश्मीर यात्रा जून के बाद से जम्मू और कश्मीर से संबंधित दूसरी सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक घटना है, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित राजनीतिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को नई दिल्ली में आमंत्रित किया था।

इसके बाद, मोदी सरकार के कई मंत्रियों ने आउटरीच कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। सितंबर में, अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि आंतकी घटना के बीच भी गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि नए जम्मू-कश्मीर का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता में है और आतंकी घटनाएं सरकार के इरादे नहीं बदल सकती है और ना ही सरकार का रास्ता रोक सकती है। बल्कि सरकार आतंकवादी घटनाओं और आतंकियों के साथ सहानुभूति रखने वालों के साथ भी सख्ती से निबटने की रणनीति पर चर्चा करने वाली है।
 

जम्मू में अमित शाह - फोटो : ani
आतंकी घटनाएं के बढ़ने के बीच यात्रा
अमित शाह ने ही जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और राज्य को दो हिस्सों में बांटने वाले 'जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक' संसद में पेश किया था। उसके बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया। उन्होंने संसद में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा था कि इससे आतंकवाद पर अंकुश लगाएगा और जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिरता आएगी।

लेकिन इत्तेफाक से उनकी यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पिछले कुछ दिनों से राज्य में आतंकवादी घटनाएं काफी बढ़ गई हैं और कई प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी गई है। भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने इस सप्ताह की शुरुआत में कश्मीर घाटी का दौरा किया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के खिलाफ चौतरफा अभियान शुरू किया था।

भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर के पुंछ-राजौरी इलाके में सबसे व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। घने जंगल क्षेत्रों में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में दो जूनियर कमीशंड अधिकारियों (जेसीओ) समेत नौ जवान शहीद हो गए हैं। हालांकि, रिपोर्टों से पता चलता है कि ड्रोन का उपयोग करने के बावजूद, सुरक्षा बलों को इस बात की आशंका है कि कई आतंकवादी अभी भी छिपे हुए हैं। बताया जा रहा है कि आतंकी करीब दो महीने से इलाके में छिपे हुए हैं। 

सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर उच्च स्तरीय बैठक 
इस साल की शुरुआत में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संसद को बताया कि 2019 की तुलना में 2020 में आतंकवाद की घटनाओं में 59 प्रतिशत की कमी आई है। और 2020 में इसी अवधि की तुलना में जून 2021 तक 32 प्रतिशत की कमी आई। लेकिन अचानक सितंबर महीने के बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाएं बढ़ गई हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने केंद्र शासित प्रदेश में और उसके बाहर हमलों को अंजाम देने के लिए विभिन्न आतंकवादी समूहों की रची गई साजिश का खुलासा करने के मामले में अब तक 13 आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। शाह ने इन्हीं घटनाओं के मद्देनजर राजभवन में जम्मू कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की है।  

तालिबान (फाइल) - फोटो : ANI
तालिबान से है इसका कनेक्शन
सुरक्षा विशेषज्ञ जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में हुए इजाफे को अफगानिस्तान में हुए सत्ता परिवर्तन से जोड़ कर देख रहे हैं। जहां 15 अगस्त को तालिबान ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान के आने के बाद से ही कश्मीर घाटी में अशांति फिर से फैलने लगी है। विशेषज्ञों को यह आशंका इसलिए भी हो रही क्योंकि तालिबान ने दावा किया था कि उन्हें भी "मुस्लिम कश्मीरियों के लिए बोलने का अधिकार" है।

रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल ए के सिवाच (रिटायर्ड)  का मानना है कि जब से अफगानिस्तान में ताबिलान आया है पाकिस्तान को ऐसा लगता है कि विजय मिल गई है। अभी जितनी आतंकी घटनाएं कश्मीर में हो रही हैं वह पाकिस्तान के इशारे पर ही हो रही हैं।  काबुल पर कब्जा करने के लिए जैश ए मुहम्मद और लश्कर ए तैयबा के 10 हजार आतंकी लड़ रहे थे। वे अब पीओके में आ गए हैं। इनकी योजना यही है कि वे सर्दियों में भारत के अंदर घुसपैठ करें।

मोदी सरकार की कूटनीतिक सफलता
हाल ही में, जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जम्मू और कश्मीर और दुबई के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गया है। भारत की कश्मीर नीति को लेकर भारत को कोसने के लिए इस्लामिक राष्ट्रों के बीच दुबई के साथ हुए इस हुए इस समझौता ज्ञापन को मोदी सरकार की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है। वहीं दुबई-कश्मीर के बीच हुए इस समझौते को पाकिस्तान के भारत विरोधी अभियान को कमजोर करने और पाकिस्तान को अलग करने के रूप में भी देखा जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर डीडीसी चुनाव परिणाम के दौरान की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
चुनाव की अटकलें
अमित शाह जम्मू-कश्मीर में तीन दिन बिताएंगे, जहां वे कई सरकारी कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का भी जायजा लेंगे और वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे। साथ ही उनके कश्मीरी पंडितों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और श्रीनगर के युवाओं से संवाद करने का भी कार्यक्रम है। बताया जा रहा है कि शाह वहां पंचायत सदस्यों और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करेंगे।

इसी साल 24 जून को जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं के साथ सर्वदलीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर संकेत दिया था कि जल्द ही केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा था कि परिसीमन तेजी से होना है ताकि चुनी हुई सरकार मिल सके।

इससे इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि मोदी सरकार उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में चुनाव के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा चुनाव करा सकती है। इस लिहाज से अमित शाह की यात्रा का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। हालांकि बताया जा रहा है कि किसी भी स्थानीय राजनीतिक दल को इस पर चर्चा के लिए नहीं बुलाया गया है, क्योंकि सरकार राज्य में अशांति के बीच चुनाव की बात नहीं छेड़ना  चाहती है।


ज्यादतर कार्यक्रम चुनाव तैयारी से जुड़े?
जबकि घाटी के एक स्थानीय पत्रकार ने बताया-शाह की इस यात्रा को भाजपा के कार्यकर्ता भी चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं, क्योंकि वे तीन दिनों तक यहां रुकने वाले हैं और इस दौरान उनकी कार्यक्रमों की सूची देखिए, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा बैठक के अलावा बाकी के ज्यादातर कार्यक्रम चुनाव की तैयारियों से जुड़े हुए लगते हैं। यहां पार्टी नेता और कार्यकर्ता भी पूरी तरह चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

गुपकार समझौते को लेकर ऑल मीटिंग पार्टी में शामिल नेता (फाइल नेताः - फोटो : amar ujala
भाजपा के खिलाफ गुपकार गठबंधन
कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के विरोध में कश्मीर घाटी में लगभग कोई जन आंदोलन नहीं हुआ था लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला (नेशनल कॉन्फ्रेंस के) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ्ती सहित कई राजनेताओं को नजरबंद कर दिया गया था। इन राजनेताओं रिहाई के बाद ही सात क्षेत्रीय दलों ने मिलकर भाजपा के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा पीपुल्स अलायंस फॉर गुप्कर डिक्लेरेशन (पीएजीडी) का गठन किया। गुपकार गठबंधन मिलकर जिला विकास परिषद का चुनाव भी लड़ चुका है।

परिसीमन का काम जारी
परिसीमन अधिनियम 2002 के लागू होने के साथ ही परिसीमन आयोग ने जम्मू-कश्मीर में अपना काम शुरू कर दिया है। इसे 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा रहा है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए परिसीमन बहुत महत्वपूर्ण कवायद और चुनौतीपूर्ण कार्य है। परिसीमन के बाद ही चुनाव प्रक्रिया शुरु की जा सकती है। बताया जा रहा है कि गृह मंत्री परिसीमन कार्य की प्रगति को लेकर भी चर्चा करेंगे। परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर में सात नई विधानसभा सीट बढ़ेंगी 





 
और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next