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अमर उजाला सीरीज पार्ट-2 : यूपीएससी की हिंदी, पुरोधाओं ने कहा- इस तरह की भाषा का चलन नहीं, हर किसी को समझने में हो सकती है दिक्कत

Wed, 13 Oct 2021 06:09 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

हिंदी के विद्वानों का कहना है कि इस तरह के शब्द आम बोलचाल की भाषा में नहीं हैं। यह तो अंग्रेजी से भी ज्यादा विदेशी हैं...। ऐसे शब्द ऊंची कक्षाओं में भी नहीं पढ़ाए जाते। इसलिए अचानक सामने पड़ने पर इनका अर्थ निकाल पाना संभव नहीं है।
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यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जाहक, शेषमूलक, वज्रशल्क सरीखे हिंदी के शब्द यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परीक्षार्थियों के लिए ही अबूझ नहीं हैं, हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकारों ने भी इनके इस्तेमाल पर हैरानी जताई है। सैकड़ों छात्र-छात्राओं को शोध कराने वालों को भी इनका ‘बोध’ नहीं है।

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हिंदी के विद्वानों का कहना है कि इस तरह के शब्द आम बोलचाल की भाषा में नहीं हैं। यह तो अंग्रेजी से भी ज्यादा विदेशी हैं...। ऐसे शब्द ऊंची कक्षाओं में भी नहीं पढ़ाए जाते। इसलिए अचानक सामने पड़ने पर इनका अर्थ निकाल पाना संभव नहीं है। इसके लिए या तो गूगल का सहारा लेना पड़ेगा या फिर किसी हिंदी शब्दकोष जानने वाले किसी तकनीकी विशेषज्ञ का।

नसीहत : गूगल से अनुवाद करने की जगह बोलचाल की हिंदी का करें इस्तेमाल
हिंदी साहित्यकारों की सलाह है कि गूगल से अनुवाद कर बंद कमरे में हिंदी के मानक शब्द तय करने की जगह यूपीएससी को आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। यह तभी संभव है, जब शब्दों को तय करने वाले अंग्रेजी की जगह मूलत: हिंदी में सोचेंगे और उसके अनुसार ही मानक शब्दों का चयन करेंगे।
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बंद कमरे में तय शब्द किताबों में नहीं
यह आम बोलचाल के शब्द नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों द्वारा गढ़े गए अंग्रेजी के शब्दों के हिंदी नामकरण हैं। भारत सरकार के वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग नियमित रूप से वैज्ञानिक शब्दों का हिंदी में नामकरण करता है। जैसे कि टेक्नोलॉजी को हिंदी में तकनीक मान लिया गया है। इस तरह के शब्द आयोग के सदस्यों द्वारा बंद कमरे में गढ़े जाते हैं, लेकिन अधिकतर शब्दों को अभी भी किताबों में कम लिखा गया है। हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों का दुर्भाग्य है कि जिन शब्दों को अब तक उन्होंने पढ़ा नहीं है, यूपीएससी की परीक्षा में वो शब्द उनके प्रश्नपत्र में शामिल कर लिए गए। - अशोक चक्रधर हिंदी साहित्यकार

पेपर सेट कराने के लिए भाषा विशेषज्ञ बुलाने चाहिए
यह तो अंग्रेजी से भी ज्यादा विदेशी हैं। यह शब्द अंग्रेजी से हिंदी में मशीनी अनुवाद हैं। हर शब्द का अर्थ गूगल ट्रांसलेशन के माध्यम से नहीं हो सकता है। हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए यह तो समझ के ही परे हैं। अंग्रेजी से हिंदी और हिंदी से अंग्रेजी गूगल अनुवाद से निकले शब्द अर्थ का अनर्थ कर देते हैं। यूपीएससी परीक्षा के प्रश्न पत्र में इस तरह के शब्द परीक्षार्थियों को कहां से समझ आए होंगे। यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा की साख के लिए पेपर सेट कराने के लिए भाषा विशेषज्ञ बुलाने चाहिए। - प्रो. राजेश झा, दिल्ली विश्वविद्यालय

जो शब्द शब्दकोश में नहीं, वह प्रश्न पत्र में आ गए
यह तो गूगल अनुवाद है। इसमें ज्यादा दिक्कत नहीं। इससे बड़ी बात समीक्षा के स्तर पर है। बगैर हिंदी के ठीक शब्दों को तय किए उसे बाहर नहीं आना चाहिए। यह कैसे संभव है जो शब्द हिंदी के शब्दकोश में नहीं, वह कैसे प्रश्न प्रत्र में आ गए। होना यह चाहिए कि अगर हम छात्रों के साथ इंसाफ करना चाहते हैं, उनके ज्ञान को परखना है तो भाषा सरल होनी चाहिए। बगैर इसके हिंदी माध्यम के छात्रों का भला नहीं हो सकता। - प्रोफेसर सच्चिदानंद सिन्हा,  क्षेत्रीय विकास संस्थान, जेएनयू

परीक्षार्थी समझेगा नहीं तो जवाब क्या देगा
यह इतने गूढ़ शब्द हैं कि परीक्षार्थी यदि अर्थ ही नहीं समझे तो वह उत्तर क्या देगा। प्रतिष्ठित परीक्षा में इस तरह के गूढ़ शब्द नहीं रखने चाहिए। इनकी जगह समानार्थक शब्द रखे जा सकते हैं, जिनके अर्थ सामान होते हैं और परीक्षार्थी उन्हें आसानी से समझ सकते हैं। इसका उदाहरण इस तरह से दिया जा सकता है कि झंडा शब्द के कई अर्थ हैं, जैसे- परचम व पताका। ऐसे ही सामान शब्दों होने से परीक्षार्थियों को भाषा की किलिष्ठता कम लगेगी। - डॉ. हंसराज सुमन, हिंदी प्रोफेसर, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय

यह सभी वैज्ञानिक शब्द हैं...
यूपीएससी के प्रश्न पत्र में शामिल सभी वैज्ञानिक शब्द हैं, विज्ञान की अधिकतर किताबें अंग्रेजी में हैं। हमारे यहां प्रशासनिक शब्दावली के लिए वैज्ञानिक शब्दों को हिंदी में गढ़ा जाता है, लेकिन इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि हिंदी में गढ़े इन अपरिचित शब्दों के साथ ब्रेकेट में अंग्रेजी के शब्द लिखे जाएं। यूपीएससी ने ऐसा किया होता तो छात्रों को सवाल समझने में कठिनाई नहीं होती। किसी ऐसे व्यक्ति ने अंग्रेजी के प्रश्न पत्र का हिंदी में अनुवाद किया, जिसे विज्ञान की समझ नहीं है। यदि ऐसा नहीं होता तो अनुवादक को अंदाजा होता कि नए शब्द परीक्षार्थियों को आखिर कैसे समझ में आएंगे। - प्रो. देवशंकर नवीन, हिंदी साहित्यकार, जेएनयू

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