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Hathras: आखिर क्या छुपाना चाहता था बाबा और उसकी पिंक आर्मी, इस अधिकारी ने बताई नारायण साकार के इस राज की कहानी

आशीष तिवारी
Updated Thu, 04 Jul 2024 05:29 PM IST

सार

वरिष्ठ आईपीएस और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी आरपी मीना कहते हैं कि यह बात तो निश्चित तौर पर जांच की बात है कि आखिर कोई व्यक्ति किसी कार्यक्रम को इस तरह से सीक्रेट क्यों रखना चाहता है। वह भी तब जब कि इसका आयोजन एक खुले मैदान में हो रहा है और ढोल नगाड़े बजा करके किया जा रहा है। 
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साकार हरि बाबा। - फोटो : अमर उजाला


सिकंदरा राव के इलाके में होने वाले बाबा के कार्यक्रम में आखिर ऐसा क्या था जो बाबा और उसकी पिंक आर्मी नहीं चाहती थी कि मोबाइल में कुछ भी कैद हो। वरिष्ठ आईपीएस और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी आरपी मीना कहते हैं कि यह बात तो निश्चित तौर पर जांच की बात है कि आखिर कोई व्यक्ति किसी कार्यक्रम को इस तरह से सीक्रेट क्यों रखना चाहता है। वह भी तब जब कि इसका आयोजन एक खुले मैदान में हो रहा है और ढोल नगाड़े बजा करके किया जा रहा है। रिटायर्ड आईपीएस मीना कहते हैं कि उनको भी इस बात की जानकारी हुई है कि वहां पर वीडियो और फोटोग्राफी को पूरी तरीके से प्रतिबंधित किया गया था। वह सवाल उठाते हैं कि आखिर वहां के आयोजकों को क्या इस बात का अंदेशा था कि किसी भी तरीके की कोई बड़ी घटना हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो उसके फिलहाल कोई सबूत ना दिखे। मीना कहते हैं कि बाबा के प्रवचन के वीडियो कभी पब्लिक में बहुत ज्यादा आए हों तो कोई बताए। हालांकि वह बताते हैं कि घटना के बाद जिस तरीके से बाबा निशाने पर आए हैं उससे निश्चित तौर पर उनके खिलाफ कार्रवाई तो की जानी ही चाहिए। 


मोगलगढ़ी के रहने वाले अतुल सचान कहते हैं कि उन्होंने मंगलवार को दोपहर 11 बजे के करीब जब सत्संग स्थल पर जाकर वीडियो बनानी शुरू की, तो सेवादारों ने उनसे झगड़ा करना शुरू कर दिया। वह कहते हैं क्योंकि वह स्थानीय हैं और उनके साथ गांव के लोग भी थे इसलिए वहां सेवादारों से भिड़ गए। बावजूद इसके सेवादारों ने उनके मोबाइल से बहुत से वीडियो डिलीट करवा दिए। उन्होंने एक वीडियो दिखाते हुए कहा कि जिस तरीके के हालात इस वीडियो में दिख रहे हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता था कि कितना मिस मैनेजमेंट था। अतुल कहते हैं कि जो घटना हुई है, उसके पीछे इस वीडियो से तस्दीक की जा सकती है कि कुप्रबंधन के चलते ही यह पूरी घटना हुई है। उनका कहना है कि यहां पर पुलिस से ज्यादा बाबा के सेवादार लगे हुए थे। जो लोगों के आने-जाने, रहने और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी संभाले हुए थे। लेकिन सेवादारों के माध्यम से ऐसे बड़े आयोजनों की जिम्मेदारियां तब तक नहीं सफल होती हैं, जब तक पुलिस और प्रशासन का अमला भी वहां पर मौजूद न हो। अतुल कहते हैं कि जितने भी पुलिस वाले यहां पर थे वह भीड़ के लिहाज से ना के बराबर थे। 


स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा के सेवादारों ने जिस तरीके से दबंगई की, वह भी चरम पर है। वह कहते हैं कि मुख्य सड़क के साथ-साथ आसपास की सड़कों से कौन गुजरेगा और कौन नहीं गुजरेगा, इसकी भी ठेकेदारी बाबा के सेवादारों ने ली रखी थी। घटनास्थल पर मौजूद चंकी साहू कहते हैं कि उनका और उनके रिश्तेदारों का तो सेवादारों से कई बार इसे लेकर विवाद भी हुआ। वह कहते हैं, जिस खेत के पास से सड़क बनाकर बाबा को सत्संग स्थल पर ले जाने की तैयारी थी, उसी के पास से ही उनके गांव को रास्ता जाता है। लेकिन बाबा के सेवादारों ने उस रास्ते पर भी आने-जाने के लिए कई तरह के प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए थे। साहू कहते हैं कि इससे नाराज होकर उनके साथ के कई लोगों ने इसका विरोध भी किया और बाबा के सेवादारों से भिड़ भी गए।  
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