उत्तर प्रदेश सरकार ने हाथरस के मुगलगढ़ी इलाके में हुए समागम के बाद की घटना को लेकर जांच कमेटी बना दी है। जांच कमेटी अपनी पूरी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। लेकिन इसी दरमियान कुछ ऐसी अहम जानकारियां भी सामने आई हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि जिम्मेदार अधिकारियों और प्रशासन की बड़ी लापरवाही की वजह से यह घटना हुई है। अमर उजाला डिजिटल की टीम ने जब घटनास्थल पर जाकर लोगों से बातचीत की, तो पता चला कि जिस जगह पर बाबा का समागम हुआ था दरअसल वह पूरी की पूरी जमीन एक तरह से दलदली हो चुकी थी। इलाके के रहने वाले अयोध्या प्रसाद कहते हैं कि बीते कुछ दिनों से यहां पर लगातार बारिश हो रही है। उस बारिश के चलते समागम स्थल पर पूरी तरीके से पानी भर गया था। हालात ऐसे थे कि अगर एक आदमी भी वहां पर जाता, तो उसका पांव दलदली मिट्टी में धंस जाता था। वह कहते हैं कि ऐसे में लाखों लोगों की भीड़ को उस दलदली मिट्टी में कैसे भेजा गया। वह सवाल भी करते हैं कि और जवाब भी देते हैं कि आप सूखी मिटटी पर भागिए और दलदली मिट्टी में भागिए, तो आपको अंदाजा होगा कि किसी भी आपदा में कौन सी जमीन से भागना आसान होता है। मुगलगढ़ी गांव के ओमवीर सिंह कहते हैं कि दलदली जमीन पर सत्संग के बाद मची भगदड़ का हश्र क्या हुआ सबने देख लिया।
ओमवीर ने प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दलदली जमीन पर इतने लोगों की भीड़ के आयोजन की अनुमति आखिर प्रशासन ने कैसे दे दी। खुद को किसान बताने वाले ओमवीर कहते हैं कि जब उनकी समझ में यह बात आती है कि इतनी बड़ी संख्या में आई भीड़ अगर दलदली जमीन पर भागने की कोशिश करेगी, तो कितनी मुश्किल आएगी और हालात बदहाल हो जाएंगे। वह कहते हैं कि जब एक सामान्य व्यक्ति को यह बात समझ आ रही थी। तो आखिर अधिकारियों को क्या इस बात की समझ नहीं थी कि लगातार हो रही बारिश के बाद भीगे खेतों के दलदल में तब्दील होने पर हजारों लाखों लोगों के बैठने की अनुमति आखिर क्यों दी गई। उनका आरोप है कि जाहिर सी बात है प्रशासन ने यहां पर होने वाले आयोजन और वहां पर पहुंची भीड़ को लेकर न तो कोई सजगता दिखाई हर ना कोई सक्रियता।
इलाके के लोगों का कहना है कि पहले तो यहां पर वीडियो नहीं बनाने दिए जा रहे थे। थोड़े बहुत वीडियो जो उन लोगों ने बनाए हैं, उसमें यह स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि खेतों में पानी की वजह से जमीन दलदली हो गई है। भागने की स्थिति में कोई भी व्यक्ति यहां से निकल नहीं सकता था। आखिरकार हुआ भी वही। इलाके के रूपेश यादव कहते हैं कि इसी दलदली जमीन में फंसे होने के चलते लोग भाग नहीं सके और पीछे से लोग उनके ऊपर चढ़ते चले गए। नतीजा हुआ कि सवा सौ लोगों की मौत हो गई।
घटनास्थल पर पहुंची अमर उजाला डिजिटल की टीम ने भी जब पूरे इलाके को देखा, तो एक बात स्पष्ट हो गई की लगातार हो रही बारिश से खेतों में जाना दूभर है। ऐसे में समागम स्थल पर दलदल वाली जमीन पर लोगों को बैठना और उसके बाद मची भगदड़ में भागना निश्चित तौर पर जानलेवा ही साबित होना था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जब घटनास्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने भी लगातार हो रही बारिश के दौरान दलदली जमीन का मुआयना किया। इस पूरे मामले की पड़ताल कर चुकी टीम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह तथ्य सामने आया है कि दलदली जमीन पर लोगों के ना भाग पाने की वजह से भी इस घटना में मरने वालों की संख्या बढ़ी है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य शानू खान कहते हैं कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर आयोजकों और आयोजन में शामिल होने आए बाबा के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि राहुल गांधी के भी हाथरस आने और घटनास्थल पर पहुंचने की सूचना है। वह बीते 72 घंटे से घटनास्थल पर मौजूद हैं और पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी को पूरे घटनाक्रम से अवगत भी करा रहे हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी से मिली जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी घटनास्थल पर जाएंगे। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि यह पूरा मामला अब सियासी तौर पर गर्म होने वाला है।