गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोगों और भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बीआईएसएजी-एन) के बीच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरवणे ने कहा, आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए जरूरी है कि शिक्षण के साथ ऑपरेशनल समझ भी बढ़ाई जाए।
सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने मंगलवार को कहा, दो पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद के मद्देनजर देश की रक्षा क्षमता में विकास राष्ट्रीय आवश्यकता बन गई है। विघटनकारी प्रौद्योगिकी आधुनिक विश्व के चरित्र को तेजी से बदल रही है।
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स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा दे विदेशी निर्भरता घटानी होगी
गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोगों और भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बीआईएसएजी-एन) के बीच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरवणे ने कहा, आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए जरूरी है कि शिक्षण के साथ ऑपरेशनल समझ भी बढ़ाई जाए।
दूसरे देशों की उन्नत तकनीक पर निर्भरता युद्ध या संघर्ष के दौर में कई मुश्किलें पैदा करती है। ऐसे मे भारतीय सेना और बीआईएसएजी-एन के बीच की यह साझेदारी अब इस संकट का स्वदेशी समाधान खोजने में मदद करेगी। इस समझौते के मूल में आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा है। इससे रक्षा क्षमता विकास में अधिक से अधिक ‘नागरिक-सैन्य संलयन’ का मार्ग प्रशस्त होगा।
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नौसेना को मिली चौथी स्कॉर्पिन पनडुब्बी वेला
नौसेना को प्रोजेक्ट-75 के तहत मंगलवार को चौथी स्कॉर्पिन पनडुब्बी ‘वेला’ सौंपी गई। इस परियोजना में छह स्कॉर्पिन पनडुब्बी का निर्माण होना है। इन पनडुब्बियों को फ्रांस के नौसेना समूह के सहयोग से मुंबई मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड बना रही है।
वेला नाम की पनडुब्बी को कोरोना प्रतिबंधों के बावजूद 6 मई, 2019 को उतारा गया और हथियार व सेंसर सहित हर प्रकार का समुद्री परीक्षण किया गया। तीन पनडुब्बियों को पहले ही नौसेना में शामिल किया जा चुका है।