आपको यह जानकर कुछ हैरत हो रही होगी, मगर बात सौ फीसदी सच है। यहां एक ही मकान और एक ही गली में भारत और बांग्लादेश मौजूद हैं। दोनों देशों के बीच खींची गई अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा (आईबी) घरों और गलियों में से होकर गुजरती है। किसी घर का एक कमरा भारत में है तो दूसरा कमरा बांग्लादेश की सीमा में पहुंच गया।
घर का एक दरवाजा भारत में खुल रहा है तो दूसरा दरवाजा बांग्लादेश में खुलता है। एक जगह तो ऐसी है, जहां तीन फुट की गली के बीचों-बीच से आईबी रेखा गुजर रही है। ऐसे में जब कोई आदमी उस गली में चलता है तो उसका एक पांव भारत में टिकता है और दूसरा पांव बांग्लादेश में होता है।
गांव में खेत-खलिहान या पशुओं के बाड़े भी एक साथ बने हैं। खेतों में जब पानी दिया जाता है तो वह दस इंच चौड़ी आईबी को लांघ कर एक-दूसरे की सीमा में चला जाता है। पश्चिम बंगाल के लोग जब यहां खेती करने आते हैं तो हमसे बात करते हैं। एक साथ बैठते हैं। फसल कटती है तो कभी भारत की सीमा में गिरती है तो कभी बांग्लादेश में।
गांव के पशु सीमा पार जाकर एक-दूसरे देश के खेतों में चरते रहते हैं। उन्हें लाना होता है तो सीमा भी लांघनी पड़ती है। अगर कोई बीमार है या किसी के साथ कोई हादसा हो गया है तो उस वक्त गली के बीच से गुजर रही सीमा रेखा को नहीं देखा जाता। मदद के लिए तुरंत दौड़ पड़ते हैं।
बीएसएफ के अधिकारी बताते हैं कि वे समय-समय पर यहां गश्त करते रहते हैं। चूंकि बॉर्डर इतनी सघन आबादी के बीच है कि वहां हर समय नजर रखना संभव नहीं हो पाता। उदाहरण के लिए आप मस्जिद को ही ले लें। यहां पर नमाज पढ़ने के लिए दोनों देशों के लोग आते हैं। मस्जिद का ढांचा भी दोनों देशों में बंटा है। सप्ताह में बीएसएफ के जवान कई बार ग्रामीणों के साथ बैठते हैं।
दरअसल, ये ग्रामीण इंटेलीजेंस का बड़ा जरिया हैं। जब भी कोई संदिग्ध व्यक्ति गांव में प्रवेश करता है या आसपास नजर आता है तो वे लोग बीएसएफ को बता देते हैं। कोई व्यक्ति संदिग्ध उपकरण या सामग्री लेकर गांव में आया है तो देर-सवेर इसकी जानकारी बीएसएफ तक पहुंच ही जाती है। बीएसएफ संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर पुलिस के हवाले कर देती है।
बीएसएफ के लिए इस बॉर्डर की चौकसी करना खासा मुश्किल है। अगर कोई तस्कर आगे भाग रहा है और उसके पीछे बीएसएफ है तो वह गली के किसी भी उस मकान में घुस जाता है जो बांग्लादेश की सीमा में पड़ता है। इसके बाद बीएसएफ वाले सिवाय इंतजार या चेतावनी देने के कुछ नहीं कर सकते। गांव के अनेक ऐसे घर हैं, जिनका आगे का दरवाजा भारत में खुलता है तो पीछे का बांग्लादेश में।
तस्कर इसी का फायदा उठाते हैं। जैसे ही उन्हें भनक लगती है कि पुलिस या बीएसएफ वाले आ रहे हैं तो वे संदिग्ध वस्तु या सामान को गली के पार फेंक देते हैं। यानी वह वस्तु अब सीमा के पार चली गई है। बीएसएफ के कमांडेंट बीएस नेगी बताते हैं, हमारे जवान संदिग्ध गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखते हैं।
अगर हमारे पास इंटेलीजेंस से कोई ऐसी सूचना आई है कि बांग्लादेश की सीमा में गलत हरकत हो रही है या तस्कर कोई संदिग्ध वस्तु लाएं हैं तो हम बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश को सूचित कर देते हैं। वे पूरा सहयोग करते हैं और आरोपी पकड़ा जाता है। बीएसएफ और बीजीबी संयुक्त गश्त भी करती है।