मंत्रालय के अनुसार, किसान को मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए ब्लाक स्तर पर भी स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। एक ही जिले में जब कई जगहों पर ये केंद्र काम करना शुरू करेंगे तो फसलों को मौसम की मार से काफी हद तक बचाया जा सकेगा।
इन केंद्रों के जरिए मौसम एवं जलवायु में होने वाले सूक्ष्म स्तर के बदलावों की सूचना मिलेगी। मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, ये केंद्र किसान के लिए बहुत लाभदायक साबित होंगे।
जिस इलाके में वह खेती करता है या पशु पालता है, वहां अगले पांच दिन में मौसम कैसा रहेगा, उसे ये सूचना समय रहते मिलेगी।
इससे वह अपने कृषि कार्य में बदलाव कर सकता है। पशुओं के लिए चारा स्टॉक करना है या खेत में तैयार फसल को तेज बरसात से बचाने के लिए क्या करना है, वह मौसम विभाग की जानकारी के आधार पर आसानी से कर सकता है।
इन केंद्रों की जानकारी को किसान तक पहुंचाने के लिए सरकार कई कदम उठाएगी। किसान पोर्टल, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, दूरदर्शन, रेडियो, इंटरनेट और मोबाइल फोन पर एसएमएस से मौसम की सूचना पहुंचाई जाएगी।
मौजूदा समय में देश के 4.2 करोड़ किसान एसएमएस के जरिए एग्रोमेट एडवायजरी प्राप्त कर रहे हैं। किसानों को अपने जिले में मौसम की जानकारी और संबंधित कृषि मौसम संबंधी सलाह ठीक तरह से मिल जाए, इसके लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने मेघदूत नामक एक मोबाइल एप भी लांच किया है।
अब जिला एवं ब्लाक स्तर पर जब स्वचालित मौसम केंद्र काम करना शुरू कर देंगे तो किसान को यह जानकारी और अधिक सूक्ष्म रूप में प्राप्त होने लगेगी।
आंध्रप्रदेश: प्रकाशम, पूर्वी गोदावरी, वाईएसआर कडप्पा, विजय नगरम, नेल्लयोर, कुरनूल, पश्चिम गोदावरी, कृष्णा और श्रीकाकुलम