कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच लॉकडाउन पर देश में सियासत शुरू हो गई है। राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने राज्यों से लॉकडाउन को अंतिम विकल्प के रूप में अपनाने की सलाह दी है। भाजपा शासित राज्य इससे सख्ती के साथ परहेज बरत रहे हैं, लेकिन विपक्षी दलों के शासन वाले कई राज्यों में लॉकडाउन जारी है और कई अन्य राज्य इसे लागू करने की तैयारियों में जुटे हैं।
दरअसल बीते साल मार्च महीने में अचानक लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। लॉकडाउन के कारण देश की अर्थव्यवस्था अब तक रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। केंद्र सरकार को लगता है कि नए सिरे से लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर हालात संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा देशभर के महानगरों में रह रहे प्रवासी श्रमिकों में फिर से अफरातफरी मचेगी। गौरतलब है कि बीते साल इसी अफरातफरी के कारण कई प्रवासी मजदूरों की जान गई थी। इसके अलावा अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रतिकूल असर ने व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में बड़ी तबाही मचाई थी।
केंद्र सरकार के सूत्रों का मानना है कि लॉकडाउन पर सरकार के रुख से विपक्ष शासित राज्य इसके प्रति सतर्क होंगे। बता दें कि इस समय दिल्ली, झारखंड, राजस्थान में लॉकडाउन जारी है। महाराष्ट्र कैबिनेट ने भी लॉकडाउन की सिफारिश की है। कई अन्य राज्य भी लॉकडाउन लगाने की तैयारी कर रहे हैं और जहां पहले से लॉकडाउन जारी है, वहां उसकी मियाद बढ़ाने की तैयारी हो रही थी। सूत्रों का कहना है कि केंद्र के रुख से अब विपक्ष शासित राज्य लॉकडाउन लगाने से बचेंगे।
केंद्र के कहने पर अड़ी योगी सरकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के पांच शहरों में लॉकडाउन लगाने का निर्देश दिया था। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के कहने पर ही योगी सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अगर हाईकोर्ट के आदेश के बाद लॉकडाउन लगता तो लोगों में कोरोना के मोर्चे पर राज्य सरकार के असफल रहने का संदेश जाता।
क्या पीएम ने लॉकडाउन के फैसले को माना चूक?
पीएम की लॉकडाउन को अंतिम विकल्प के रूप में आजमाने के संदेश के बाद सियासी गलियारे में इस पर कई तरह की चर्चा हो रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पीएम ने बीते साल लगाए गए लॉकडाउन को अपनी चूक के रूप में स्वीकार कर लिया है? गौरतलब है कि बीते साल लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के पक्ष और विपक्ष में कई तर्क दिए गए थे। हालांकि तब सरकार और भाजपा ने लॉकडाउन के फैसले का आक्रामक ढंग से बचाव किया था।