स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) को यूएपीए के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया जाए या नहीं इस पर फैसला करने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायाधिकरण का गठन किया है। गौरतलब है कि 29 जनवरी को केंद्र सरकार ने आतंकी संगठन सिमी पर लगाए गए प्रतिबंध को पांच साल के लिए बढ़ा दिया था।
केंद्र ने सिमी पर पांच साल का प्रतिबंध बढ़ाया
सिमी पर पांच साल का प्रतिबंध बढ़ाते हुए सरकार ने कहा था कि यह संगठन आतंकवाद को बढ़ावा देने, शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने में शामिल रहा है। गौरतलब है कि 10 राज्यों - आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश ने यूएपीए के प्रावधानों के तहत सिमी को 'गैरकानूनी संघ' घोषित करने की सिफारिश की है। 2001 में सिमी को पहली बार 'गैरकानूनी घोषित' किया गया था, जिसके बाद से समय-समय पर इस संगठन पर प्रतिबंध बढ़ाया गया।
प्रतिबंध को बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय ने कही थी यह बात
गृह मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा था कि सांप्रदायिक माहौल खराब करना, राष्ट्र विरोधी भावनाओं को प्रसारित करना, उग्रवाद को समर्थन देने, देश की अखंडता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना जैसी हानिकारक गतिविधियाओं को अंजाम देकर अलगाववाद को बढ़ाकर देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बाधित कर रहा है। गृह मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा कि सिमी अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए है और अपने समर्थकों को फिर से संगठित कर रहा है, जो अभी भी फरार हैं।