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Parliament: सरकार ने शीतकालीन सत्र से पहले दो दिसंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई, इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

Sat, 25 Nov 2023 10:13 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बता दें कि शीतकालीन सत्र चार दिसंबर से शुरू होकर 22 दिसंबर तक चलेगा । आमतौर पर सर्वदलीय बैठक सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही बुलाई जाती है, हालांकि तीन दिसंबर को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना के कारण इस बार बैठक दो दिसंबर को बुलाई गई है।
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सर्वदलीय बैठक (फाइल) - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने शीत सत्र से पहले संसद की कार्यवाही को सुचारू ढंग से चलाने और अलग-अलग मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए दो दिसंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। गौरतलब है कि इस बार शीत सत्र में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में उठे मुद्दों से लेकर महुआ मोइत्रा के कैश फॉर क्वेरी मामले तक पर हंगामा होने के आसार हैं। 
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बता दें कि शीतकालीन सत्र चार दिसंबर से शुरू होकर 22 दिसंबर तक चलेगा । आमतौर पर सर्वदलीय बैठक सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही बुलाई जाती है, हालांकि तीन दिसंबर को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना के कारण इस बार बैठक दो दिसंबर को बुलाई गई है।

इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा 
माना जा रहा है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों का असर शीतकालीन सत्र में देखने को मिलेगा। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ संसद में पैसे लेकर प्रश्न पूछने के आरोपों से जुड़े मामले में लोकसभा की आचार समिति की रिपोर्ट भी इस सत्र के दौरान सदन में पेश की जाएगी। संसदीय समिति ने मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने की अनुशंसा की है।
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प्रमुख आपराधिक कानूनों के स्थान पर लाए गए तीन विधेयकों पर सत्र के दौरान विचार किए जाने की संभावना है। गृह मामलों की स्थायी समिति ने हाल ही में तीन विधेयकों पर रिपोर्ट को स्वीकारा है। संसद में लंबित एक अन्य प्रमुख विधेयक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा है, जिस पर हंगामा होने की संभावना है। 

मानसून सत्र में पेश किए गए इस विधेयक को सरकार ने विपक्ष और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों के विरोध के बीच संसद के विशेष सत्र में पारित करने पर जोर नहीं दिया। सरकार इस विधेयक के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के दर्जे को कैबिनेट सचिव के बराबर लाना चाहती है। मौजूदा समय में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर का दर्जा प्राप्त है।
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