सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सर्च इंजन आदि से कहा कि वे मिल-बैठ कर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर प्रचारित या प्रसारित होने वाले यौन अपराधों से संबंधित वीडियो को ब्लॉक करने का तकनीकी समाधान निकालें।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने गूगल इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, याहू इंडिया, फेसबुक आदि को अपने-अपने प्रतिनिधियों का नाम देने के लिए कहा है, जो साइबर क्राइम पर लगाम लगाने से संबंधित बैठक में भाग ले सकें। पीठ ने सभी को नाम तय कर पर 22 मार्च तक बताने के लिए कहा है।
सुनवाई केदौरान सीबीआई के अधीन साइबर सुरक्षा के लिए काम करने वाले अधिकारियों ने पीठ को बताया कि आपत्तिजनक सामग्रियों कीवेबसाइट पर अपलोड होने से पहले ब्लॉक करना एक तकनीकी चुनौती है। इसके लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों की दरकार है।
उन्होंने बताया कि करीब 50 देशों ने बाल अपराधों से संबंधित वीडियो पर रोक लगाने के लिए हॉटलाइन बनाया है लेकिन भारत में यह सेवा अब तक शुरू नहीं की जा सकी है। अधिकारियों ने पीठ को बताया कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी रोकने के लिए इंटरपोल की सहायता ली जा रही है। जब कभी भी आपत्तिजनक सामग्री वेबसाइट पर अपलोड होती है तो इंटरपोल को इसकी जानकारी दी जाती है।
मालूम हो कि सरकार सुप्रीम कोर्ट केसमक्ष यह कह चुकी है कि उसके पास ऐसा कोई तंत्र मौजूद नहीं है, जिससे यौन हिंसा संबंधित वीडियो को वेबसाइट पर अपलोड होने से पहले रोका जाए। इससे पहले गूगल ने इस संबंध में अपने हाथ खड़े कर दिए थे।