इटावा में बनाया जाएगा स्मारक: अखिलेश
आगरा। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गीतकार को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा कि पद्मभूषण नीरज मूलरूप से इटावा जिले के थे, इसलिए समाजवादियों को जब भी मौका मिलेगा, वह गोपाल दास ‘नीरज’ की याद में स्मारक बनवाएंगे। जैसे लाइन सफारी को देखने लोग दूर-दूर से आते हैं, उसी प्रकार उनकी यादगार को देखने आएंगे। ब्यूरो
ऊपर शाम जम गई होगी : कुमार विश्वास
आगरा। ‘हमारा बड़ा नुकसान हुआ है। हमारा औलिया, पीर, कबीर उठा है, लेकिन निश्चित रूप से जब वह ऊपर पहुंचे होंगे, जहां साहिर लुधियानवी, निदा फाजली बैठे होंगे, उन्होंने जरूर उन्हें गले लगाकर कहा होगा, आओ पार्टनर यहां जमात लगाते हैं, और वहां शाम जम गई होगी। नीरज जी वहां भी नीरज निशा का आयोजन कर रहे होंगे।’
राहुल गांधी ने भेजा शोक संदेश
आगरा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने महाकवि गोपालदास नीरज के निधन पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने शनिवार को प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह को शोक संदेश लेकर बल्केश्वर स्थित उनके घर भेजा। उन्होंने कहा, हिंदी गीत और कविता के अद्भुत हस्ताक्षर नीरज के निधन से हिंदी प्रदेश की जनता सहित कांग्रेस परिवार बेहद दुखी है। भारतीय फिल्म उद्योग को भी उनके गीतों से नई ऊंचाइयां मिलीं। ब्यूरो
हिंदी साहित्य जगत के गौरव थे नीरज : शिवपाल
आगरा। वरिष्ठ सपा नेता व पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने गोपाल दास ‘नीरज’ के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, नीरजजी का जाना अपूर्णनीय क्षति है। इसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। वह हिंदी साहित्य जगत के गौरव थे। ब्यूरो
उनकी जगह कोई नहीं ले सकता: सुरेंद्र शर्मा
आगरा। प्रख्यात हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि गोपाल दास ‘नीरज’ हमारे कवि सम्मेलनों की एकमात्र ऐसी इमारत थे, जो नींव थे और गुंबद भी। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता।
सहज व्यक्तित्व के धनी थे : उदय प्रताप
आगरा। कवि उदय प्रताप ने कहा, गोपाल दास ‘नीरज’ जितने श्रेष्ठ कवि थे, उतने ही सहज व्यक्तित्व के धनी थे। उनसे हर मुलाकात में कुछ नया सीखने को मिलता था।
नीरज की देहदान की इच्छा नहीं हुई पूरी
नीरज की देहदान की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। शरीर में इंफेक्शन के कारण परिजनों ने अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। नीरज ने देहदान से संबंधित सहमति पत्र पर अक्तूबर 2015 में हस्ताक्षर किया था। मरणोपरांत पार्थिव शरीर को एएमयू के जेएलएन मेडिकल कॉलेज के छात्रों एवं शिक्षकों को पठन-पाठन एवं शोध के लिए समर्पित करने की इच्छा व्यक्त की थी।