शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ दोस्ती के कारण पहले गोवा पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकी, लेकिन भाजपा द्वारा पीठ में छुरा घोंपे जाने के बाद अब शिवसेना ने पंचायत स्तर से लेकर आम चुनाव तक तटीय राज्य में भविष्य के सभी चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि गोवा को शिवसेना की जरूरत है क्योंकि केंद्र और राज्य में सत्ता में होने के बावजूद भाजपा सतत विकास में विफल रही है।
दरअसल, महाराष्ट्र में मराठी मानुष की राजनीति करने वाली शिवसेना ने गोवा के चुनाव में भी मराठी कार्ड चल दिया है। शिवसेना ने भूमिपुत्रों को न्याय देने का वादा कर गोवा के मराठियों के हितों की रक्षा करने का भरोसा दिया है। आदित्य ठाकरे ने शनिवार को गोवा विधानसभा चुनाव के लिए डिजिटल घोषणा पत्र जारी किया। शिवसेना गोवा में एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। शिवसेना ने 10 सीट पर उम्मीवार उतारे हैं। पणजी सीट से दिवंगत भाजपा नेता मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर के समर्थन में शिवसेना ने अपने प्रत्याशी शैलेंद्र वेलिंगकर को वापस ले लिया है। वहीं, एनसीपी ने 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। एनसीपी ने मध्यम वर्ग के लिए पर्यटन को बढ़ावा देने का वादा किया है।
पहले मतदान फिर वैलेंटाइन डे मनाएंगे युवा
14 फरवरी को वैलेंटाइन डे है। इसी दिन गोवा में एक ही चरण में सभी 40 सीटों पर मतदान होंगे। गोवा में वैलेंटाइन डे खास आकर्षण का केंद्र होता है। समुद्री बीच युगल जोड़ों से भरे होते हैं। इसको देखते हुए निर्वाचन आयोग ने उन मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया है जो पहली बार मतदान करने वाले हैं। निर्वाचन आयोग ने गोवा की एथलीट रबेका जैसे युवाओं को इस मुहिम से जोड़ा है। इसके साथ ही, गोवा की जानी मानी फैशन डिजाइनर वर्मा ड मेल्लो के जरिए सोशल मीडिया पर अपने मतदान का सही तरीके से इस्तेमाल करने का संदेश दिया जा रहा हैं। इस अभियान के कारण युवा पहले मतदान, फिर प्यार का इजहार करने वाले हैं।
मतदाताओं की मूक सहमति से बेचैन हैं उम्मीदवार
गोवा छोटा सा राज्य है जहां किसी विधानसभा में मतदाताओं की संख्या बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के एक वार्ड जितनी यानी करीब 27 से 30 हजार के आसपास है। इसलिए न केवल मतदाता सभी उम्मीदवारों को अच्छी तरह जानते पहचानते हैं बल्कि प्रत्याशी भी एक-दूसरे से परिचित हैं। पणजी के मनोज कुमार बताते हैं कि इसलिए मतदाता किसी भी उम्मीदवार को ना कहने का रिस्क नहीं लेता। गोवा के जागरूक मतदाताओं की यही मूक सहमति उम्मीदवारों को बेचैन कर रही है।