पश्चिम एशिया में दो महीने से अधिक समय से जारी हिंसक संघर्ष में 19 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इसी बीच हमास के चंगुल से बंधकों की रिहाई के प्रयास तेज होने की संभावना है। इस्राइल और कतर के बीच वार्ता फिर शुरू होने के संकेत हैं।
दो महीने से अधिक समय से जारी हिंसक संघर्ष में अब तक 19 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इस्राइली खुफिया एजेंसी- मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया और कतर के प्रधानमंत्री की बैठक के बाद हमास के चंगुल में फंसे कैदियों को रिहा कराने का प्रयास किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक कतर और इस्राइल संघर्ष के बीच बातचीत के लिए सहमत हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी और मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया के बीच वार्ता होने के आसार हैं।
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वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक इस्राइल और कतर के अधिकारी नॉर्वे में मिल सकते हैं। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हमास के बंधकों को रिहा करने और संघर्षविराम पर भी बातें होंगी। गाजा पट्टी में हमास के कब्जे में फंसे लोगों को मुक्त कराने के बदले हमास ने इस्राइल से फलस्तीनी कैदियों को रिहा करने की मांग की है। कतर के प्रधानमंत्री और इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में मिलने वाले थे।
इस्राइल और हमास के युद्ध के बीच संघर्षविराम के उपायों से जुड़ी इस खबर के अनुसार दोनों देशों के अधिकारियों के बीच संघर्षविराम की संभावनाओं पर बातें हुईं। इस खबर से पहले इस्राइली सेना का बयान सामने आया था। इस्राइली सेना ने तीन बंधकों की हत्या मामले में जांच की बात कही थी। सेना के अनुसार, सैनिकों ने बंधकों को खतरा मानते हुए उन पर हमले किए थे।
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रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मोसाद प्रमुख बार्निया मिस्र के अधिकारियों से भी बातें कर सकते हैं। बातचीत की सहमति बनने के संकेत वाली यह खबरें ऐसे समय में आई हैं, जब लंबे समय से इस्राइल और हमास के बीच गतिरोध बरकरार हैं। बंधकों की रिहाई के किसी ऐसे प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है।
बता दें कि पिछली बार के युद्धविराम में करीब सात दिनों तक गोलाबारी और हमले बंद रहे थे। नवंबर में मानवीय आधार पर रोकी गई लड़ाई के दौरान हमास के चंगुल से 100 से अधिक महिलाएं, बच्चे और विदेशी लोग रिहा हुए थे। हमास की तरफ से छोड़े गए बंधकों के बदले में इस्राइली सेना ने 240 महिलाओं और युवाओं को रिहा किया था।