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Galwan: भारतीय सेना ने जारी की गलवान की फोटो; आर्मी चीफ पहुंचे LOC, चीन-पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश

हरेंद्र चौधरी
Updated Wed, 03 Jul 2024 09:32 PM IST

सार

Galwan: सेना प्रमुख बनते ही जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पहला जम्मू दौरा काफी मायने रखता है। पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से प्रायोजित आतंकी घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है। यह दौरा पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश है कि सेना की नई लीडरशिप आतंकवाद के मसले को लेकर काफी गंभीर है।
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नए सेना प्रमुख ने एलओसी पर तैयारियों का लिया जायजा - फोटो : अमर उजाला

नए आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने पदभार संभालते ही चीन और पाकिस्तान को संकेतों में बड़ा संदेश दिया है। बुधवार को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पहला दौरा जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा का रहा। जहां उन्होंने एलओसी पर सुरक्षा हालात की समीक्षा की। वहीं, लेह स्थित 14 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला भी पूर्वी लद्दाख में उस जगह पहुंचे, जहां आज से चार साल पहले भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इन दोनों ही दौरों से चीन और पाकिस्तान को कड़ा संदेश गया है कि सेना की नई लीडरशिप दोनों चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है। 

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नए सेना प्रमुख ने एलओसी पर तैयारियों का लिया जायजा - फोटो : अमर उजाला
नए आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने पदभार संभालते ही चीन और पाकिस्तान को संकेतों में बड़ा संदेश दिया है। बुधवार को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पहला दौरा जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा का रहा। जहां उन्होंने एलओसी पर सुरक्षा हालात की समीक्षा की। वहीं, लेह स्थित 14 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला भी पूर्वी लद्दाख में उस जगह पहुंचे, जहां आज से चार साल पहले भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इन दोनों ही दौरों से चीन और पाकिस्तान को कड़ा संदेश गया है कि सेना की नई लीडरशिप दोनों चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है। 

एलओसी से सटे फॉरवर्ड लोकेशन पर पहुंचे आर्मी चीफ
01 जुलाई को भारतीय सेना प्रमुख का कार्यभार संभालते ही जनरल उपेंद्र द्विवेदी बुधवार को जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के से सटी फॉरवर्ड लोकेशन पर पहुंचे। इस दौरान उनके साथ नॉर्दन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचींद्र कुमार और व्हाइट नाइट कोर (16 कोर) के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा भी साथ थे। इस दौरान उन्होंने नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा हालात की समीक्षा की। इस दौरान नॉर्दन आर्मी कमांडर और व्हाइट नाइट कोर कमांडर ने सेना प्रमुख को जमीनी स्तर पर ऑपरेशन तैयारियों की जानकारी दी। वहीं उन्होंने पुंछ पहुंच कर सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक भी की। नियंत्रण रेखा का दौरा करने के बाद वह नगरोटा पहुंचे, जहां उन्होंने सेना के कमांडरों से मुलाकात की और जम्मू क्षेत्र में आतंक के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन का जायजा लिया। 

नए सेना प्रमुख ने एलओसी पर तैयारियों का लिया जायजा - फोटो : अमर उजाला
नॉर्दन कमांड के कमांडर रह चुके हैं जनरल उपेंद्र द्विवेदी 
सैन्य सूत्रों ने बताया कि सेना प्रमुख बनते ही जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पहला जम्मू दौरा काफी मायने रखता है। पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से प्रायोजित आतंकी घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है। यह दौरा पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश है कि सेना की नई लीडरशिप आतंकवाद के मसले को लेकर काफी गंभीर है। खुद आर्मी चीफ नॉर्दन कमांड के कमांडर रह चुके हैं। वह जम्मू-कश्मीर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। निश्चित तौर पर उनका वह अनुभव अब काम आएगा। अगर पाकिस्तान उस इलाके में कोई उल्टा-सीधा कदम उठाएगा, तो वह उसके लिए आत्मघाती साबित होगा। 

जम्मू में आतंकियों के सात दल सक्रिय
सैन्य सूत्रों का कहना है कि घाटी में सुरक्षा हालात अपेक्षाकृत स्थिर है। लेकिन जम्मू में आतंकी फिर से पैर पसारने लगे हैं। आतंकियों के सात दल सक्रिय हैं और घने जंगलों में छुपे हुए हैं। डोडा और राजौरी, पुंछ इलाकों में आतंकियों के सफाए के लिए ऑपरेशन तेज हो गए हैं। यह इलाका भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स यानी 16 कोर के तहत आता है। 16 कोर, जो पीर पंजाल रेंज के दक्षिणी क्षेत्रों की देखभाल करती है, ने पिछले तीन वर्षों में कई बड़े आतंकवादी हमलों को देखा है। आतंकियों के सफाए में अहम योगदान देने वाली राष्ट्रीय राइफल्स की डेल्टा फोर्स और रोमियो फोर्स 16 कोर के तहत आती हैं। वह कहते हैं कि नए आर्मी चीफ को 16 कोर पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस इलाके में आतंकी हमलों को रोका जा सके। 

गलवान की फोटो साझा कर चीन को दिया संदेश
वहीं सोमवार 01 जुलाई को लेह स्थित फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स यानी 14 कोर की कमान संभालने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला का पहला दौरा गलवान का रहा। भारत-चीन के बीच चल रहे गतिरोध के बीच इस दौरे के भी बड़े मायने निकाले जा रहे हैं। वहीं चीन के लिए भी यह कड़ा संदेश है। फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट भी साझा की। हालांकि उसमें लोकेशन का नाम नहीं लिखा था, लेकिन यह वही इलाका है जहां आज से चार साल पहले भारतीय सेना और चीनी पीएलए के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में जहां भारत के 20 जवान शहीद हुए थे, तो चीनी सेना के 40 से ज्यादा सैनिकों की मौत हुई थी। 15 जून को गलवान हिंसक झड़प के चार पूरे हुए हैं। 

नए सेना प्रमुख ने एलओसी पर तैयारियों का लिया जायजा। - फोटो : अमर उजाला
त्रिशूल डिवीजन का किया दौरा
फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने सोशल मीडिया एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, "लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला ने त्रिशूल डिवीजन का दौरा किया। उन्होंने लद्दाख में अग्रिम क्षेत्रों तैनात सैनिकों से बातचीत की। उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनके अथक प्रयासों और अद्वितीय व्यावसायिकता के लिए त्रिशूल योद्धाओं की सराहना की।" हालांकि यह पहली बार नहीं जब भारतीय सेना ने गलवान की फोटो जारी की हैं। इससे पहले भी 04 जनवरी 2022 को बड़े तिरंगे को थामे भारतीय सेना के जवानों की तस्वीरें जारी की गईं थीं। कार्यभार संभालने के बाद ही लेफ्टिनेंट जनरल भल्ला ने कमान को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने सभी अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया था। उन्होंने उनसे अपने सभी प्रयासों में राष्ट्र को पहले स्थान पर रखने का भी आग्रह किया। 

चीन को उसी की भाषा में दिया जवाब 
महार रेजिमेंट के पूर्व कर्नल और पूर्वी लद्दाख में 3 डिवीजन की कमान संभाल चुके रिटायर्ड मेजर जनरल सुधाकर जी. ने अमर उजाला को खास बातचीत में बताया कि यह साइकोलॉजिकल वारफेयर का हिस्सा है और भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया है। वह कहते हैं कि प्रोपेगेंडा फैलाने में माहिर चीन को इन फोटोग्राफ्स से झटका जरूर लगेगा। वह कहते हैं कि कोई भी नया कमांडर उन जगहों पर जरूर जाता है, जहां गतिरोध बना होता है। यह सेना का तरीका है।

नए सेना प्रमुख ने एलओसी पर तैयारियों का लिया जायजा - फोटो : अमर उजाला
21 दौर की कमांडर स्तर की हो चुकी है वार्ता
लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला के तेवरों से साफ है कि चीन की कोई भी हरकत उसके लिए जोखिमपूर्ण साबित होगी। वहीं द्विस्तरीय सैन्य बातचीत में भी तेजी आने की संभावना है। 15-16 जून 2020 को हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच कम से कम 21 दौर की कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है। जिसके बाद पांच टकराव बिंदुओं पर सैनिकों की वापसी संभव हो पाई, जिनमें पैंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारे, गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में पेट्रोलिंग पॉइंट्स 15 और 17ए, और गलवान घाटी सामिल हैं। लेकिन दो अहम जगहों देपसांग प्लेंस और डेमचोक में अभी भी गतिरोध बरकार है। 

देपसांग प्लेन्स में चीनी सैनिक वाई-जंक्शन से पीपी 10 से 13 तक भारतीय पहुंच को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा यहां 972 वर्ग किमी भूमि पर पहुंचने में भी बाधा है। देपसांग प्लेन्स रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दौलत बेग ओल्डी के बेहद नजदीक है। वहीं, पूर्वी लद्दाख के साउथ में मौजूद डेमचोक में मुख्य समस्या चार्डिंग निंगलुंग नाला (सीएनएन) जंक्शन पर आ रही है। कई बार PLA ने यहां पर भारतीय चरवाहों को सीएनएन जंक्शन पर मौजूद सैडल पास पर रोक दिया है। भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की 21वें दौर की वार्ता 19 फरवरी को चुशूल-मोल्डो सीमा बैठक बिंदु पर आयोजित की गई थी। भारतीय पक्ष ने देपसांग और डेमचोक में लंबित मुद्दों के समाधान के लिए दबाव डाला, लेकिन बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
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