पूर्व सांसद अतीक अहमद के लिए जेल दूसरा घर सरीखी हो गई है। 38 साल के आपराधिक इतिहास के दौरान उन्होंने इलाहाबाद से लेकर बिहार तक संगीन वारदातें अंजाम दी और इन मुकदमों में ग्यारह बार उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। सच तो यह है कि पिछले दो दशक के दौरान उनका आधा वक्त जेल में ही गुजरा।
राजनीतिक साख कमजोर पड़ने के बाद अब उनके दिन गर्दिश में आ गए हैं। सपा के टिकट पर वह चुनाव लड़कर विधायक बनने की तैयारी कर रहे थे तभी शुआट्स में गुंडागर्दी उनके लिए भारी पड़ी। टिकट कटा और जेल जाना पड़ा। अब अदालत की सख्ती के चलते उन्हें जाने कब तक सलाखों के पीछे रहना होगा।
अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना हिस्ट्रीशीटर अतीक अहमद के खिलाफ इस साल तक 75 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। उनके गिरोह में 138 सदस्य हैं। अतीक के खिलाफ पहला मुकदमा 38 साल पहले खुल्दाबाद थाने में कत्ल का लिखा गया था। फिर तो उन पर धूमनगंज, खुल्दाबाद, शाहगंज, कोतवाली, कर्नलगंज, करेली, कीडगंज समेत अन्य थानों में हत्या गुंडा एक्ट, अवैध हथियार रखने, गैंगस्टर, बलवा, फ्राड, हेराफेरी, धमकी के आरोप में हर साल मुकदमे दर्ज होते रहे।
कचहरी में पुलिस-वकीलों के बीच शूटआउट में चार लोगों का कत्ल, चकिया में कार्यालय के पास नस्सन हत्याकांड, चांद बाबा हत्याकांड, कचहरी परिसर में बम हमला, चकिया में निवास के सामने भाजपा नेता अशरफ हत्याकांड और फिर बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड से अतीक शहर और प्रदेश में सुर्खियों में बने रहे।