पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे अजय बिसारिया ने बताया कि किस तरह पाकिस्तान को एक बार भारत के आगे घुटने टेकने को मजबूर होना पड़ा था। दरअसल, बिसारिया ने अपनी नई किताब 'एंगर मैनेजमेंट' में कई खुलासे किए हैं। उन्होंने इसमें बताया है कि किस तरह भारत ने अपने वायुसेना के लड़ाकू पायलट अभिनंदन वर्धमान को छुड़ाने के लिए पाकिस्तान की ओर नौ मिसाइलों को तान दिया था, जिससे पड़ोसी देश की सांसे फूल गई थीं। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि आखिर पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव का ही रिश्ता क्यों है।
पुलवामा के बाद जो हुआ...
अजय बिसारिया ने बताया कि पुलवामा में 14 फरवरी को आतंकी हमला हुआ था। इसका बदला लेने के लिए वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के अंदर 100 किलोमीटर तक घुसकर बालाकोट और पीओके के आतंकी ठिकानों पर कहर बरपा दिया था। भारतीय कार्रवाई से गुस्साया पाकिस्तान जवाब देने के लिए अगले ही दिन भारत में घुस गया और 27 फरवरी को आसमान में हुई जंग की चपेट में विंग कमांडर अभिनंदन का मिग-21 बायसन भी आ गया। दुश्मनों के खदेड़ते हुए मिग-21 बायसन में आग लग सकती थी। ऐसे में विंग कमांडर अभिनंदन ने पैराशूट से छलांग लगा दी, लेकिन वे जिस जमीन पर पहुंचे वे इलाका पीओके का था। पाकिस्तानी सेना ने अभिनंदन को पकड़ लिया था।
मिसाइलों से डरा पाकिस्तान
बिसारिया ने कहा, 'मैंने किताब में पायलट को वापस लाने के लिए उसके बाद हुई जबरदस्त कूटनीति के बारे में बताने की कोशिश की है।' उन्होंने कहा कि भारत में अभिनंदन की वापसी की दुआएं होने लगी और भारत सरकार ने साफ कर दिया कि पाकिस्तान को हमारे पायलट को बिनी किसी शर्त, बिना नुकसान पहुंचाएं सौंपना ही होगा। पहले पाकिस्तानी सेना ने अकड़ दिखाई, लेकिन जैसे ही पीएम मोदी और भारत सरकार ने नौ मिसाइलों को पाकिस्तान की तरफ घुमाया, वैसे ही पड़ोसी मुल्क की हालत खराब हो गई।
पीएम मोदी को कर रहे थे बार-बार फोन
पूर्व उच्चायुक्त ने बताया कि भारतीय सेना की यह तैयारी देख कर पाकिस्तानी सेना और सरकार हिल गई। वह लड़ाई को आगे नहीं बढ़ाना चाहता था। तनाव कम करने की कोशिश में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के प्रधानमंत्री पीएम मोदी को कई बार फोन किया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को समझ आ गया था कि अब उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। इसलिए उन्हें पायलट को छोड़ने का फैसला लेना पड़ा था।
अजय बिसारिया ने बताया कि वर्धमान के पकड़े जाने के बाद भारत में मौजूद पाकिस्तानी उच्चायुक्त सोहेल महमूद की उनके पास फोन आया था। उन्होंने कहा कि इमरान खान पीएम मोदी से बात करना चाहते हैं। बिसारिया ने दिल्ली संपर्क किया और फिर महमूद को बताया कि पीएम मोदी अगले कुछ घंटे उपलब्ध नहीं है। उसके बाद महमूद ने बिसारिया को फोन नहीं किया।
मैं भारत आया था
पाकिस्तान में पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने बताया, 'पुलवामा हमले के ठीक बाद, मैं भारत आया था और मैं उस टीम का हिस्सा था जो स्थिति की निगरानी कर रही थी और इससे निपट रही थी। उस समय पाकिस्तान को जो संदेश जा रहा था, वह बहुत स्पष्ट था कि अगर पायलट को वापस नहीं किया गया तो भारत उसे नहीं छोड़ेगा। हमने पाकिस्तान से जो कुछ भी सुना और हमारी जो भी बातचीत हुई, उससे हमें विश्वास था कि पायलट को वापस कर दिया जाएगा क्योंकि परिणाम गंभीर होंगे। यह एक ऐसा संदेश था, जिसने पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया था।'
इसलिए रखा ये शीर्षक
बिसारिया ने किताब के शीर्षक एंगर मैनेजमेंट पर कहा, 'मुझे पता है कि शीर्षक थोड़ा अलग है। मुझे पता चला कि भारत-पाकिस्तान रिश्ते में गुस्सा एक महत्वपूर्ण भाव है। पिछले 76 वर्षों में, विभाजन, युद्ध, आतंकवाद जैसे मुद्दों पर गुस्सा रहा है। तर्क यह है कि आप इस मुद्दे को शांति और स्थायी रूप से हल नहीं कर सकते हैं, लेकिन आप कूटनीति और अन्य माध्यमों से इसे सही कर सकते हैं। मेरा किताब को एंगर मैनेजमेंट नाम देना इन्हीं दो विचारों को जोड़कर आया है।'