चेन्नई में एक विशेष अदालत ने बुधवार को अन्नाद्रमुक की पूर्व मंत्री आर इंदिरा कुमारी और उनके पति ए बाबू को 15 लाख रुपये के सरकारी फंड के दुरुपयोग के एक मामले में पांच साल कठोर कारावास की जसा सुनाई है। सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए नियुक्त विशेष अदालत की पीठासीन अधिकारी एन एलीशिया ने दोनों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत दोषी पाए जाने के बाद यह सजा सुनाई।
अदालत की ओर से फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद ही अदालत परिसर में मौजूद इंदिरा कुमारी ने सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायत की। इसके बाद उन्हें रोयापेट्टा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके साथ ही विशेष अदालत ने तत्कालीन दिव्यांग पुनर्वास के निदेशक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी पी शनमुगम को तीन साल कैद की सजा सुनाई। इसके अलावा इंदिरा कुमारी के पूर्व निजी सहायक वेंकटकृष्णन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर बरी कर दिया गया।
समाज कल्याण मंत्री रही हैं इंदिरा कुमारी
बता दें कि इंदिरा कुमारी, जयललिता नीत कैबिनेट में वर्ष 1991-96 के दौरान समाज कल्याण मंत्री के पद पर रही थीं। बाद में साल 2006 में वह द्रमुक में शामिल हो गई थीं। यह मामला द्रमुक के सत्ता में आने के एक साल बाद वर्ष 1997 में दर्ज किया गया था। वहीं, इसे लेकर आरोपपत्र साल 2004 में दाखिल किया गया था। इस मामले में एक और आईएएस अधिकारी किरुबाकरन पर भी आरोप लगे थे लेकिन ट्रायल के दौरान उनकी मौत हो जाने के चलते ये आरोप रद्द कर दिए गए थे।
यहां जानिए आखिर क्या है ये पूरा मामला
इस मामले में सरकारी धर का दुरुपयोग करने का आरोप है। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपियों ने मिलीभगत की और सरकार की ओर दो ट्रस्टों को चलाने के लिए आवंटित किए गए रुपयों (15.45 लाख रुपये) का दुरुपयोग किया। सरकार की ओर से यह राशि मर्सी मदर इंडिया चैरिटेबल ट्रस्ट और सुनने में असमर्थ बच्चों के लिए उस समय उत्तरी अर्कोट आंबेडकर जिले में स्थित एक विशेष स्कूल का संचालन करने के लिए जारी की गई थी। इन आरोपियों ने आपराधिक कदाचार किया है।