फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jaishankar: विदेश मंत्री बोले- गलवान में एलएसी से आगे तैनात हैं दोनों देशों की सेनाएं, यह असामान्य स्थिति है

Tue, 14 May 2024 09:34 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जयशंकर ने कहा कि भारत ने भी चीन की तैनाती का कड़ा जवाब दिया। हमने भी अपनी सेनाएं वहां तैनात की। पिछले चार साल से सेनाएं गलवान में सामान्य बेस पोजीशन से आगे तैनात हैं। एलएसी पर यह तैनाती असामान्य है।
विज्ञापन
एस जयशंकर - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चीन और भारत के बीच एलएसी सीमा विवाद काफी लंबे समय से जारी है। इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बलों की तैनाती असामान्य है। देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। जयशंकर मंगलवार को इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत ने गलवान झड़प का जवाब वहां बलों की जवाबी तैनाती से दिया।

2020 में चीनियों ने समझौते को तोड़ दिया

विज्ञापन

जयशंकर ने कार्यक्रम में बताया कि 1962 की जंग के बाद 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने चीन की यात्रा की। इसका उद्देश्य स्पष्ट था कि चीन और भारत संबंधों को सामान्य बनाएंगे। यात्रा का उद्देश्य सीमा मतभेदों पर चर्चा करने के साथ-साथ सीमा पर शांति के बनाए रखना था। लेकिन 2020 में चीनियों ने इस समझौते को तोड़ दिया। भारत कोविड-19 लॉकडाउन में था, ऐसे समय पर चीन ने सीमा पर बड़ी संख्या में सेना तैनात कर दी। अब चीजें बदल गई हैं। 

जयशंकर ने कहा कि भारत ने भी चीन की तैनाती का कड़ा जवाब दिया। हमने भी अपनी सेनाएं वहां तैनात की। पिछले चार साल से सेनाएं गलवान में सामान्य बेस पोजीशन से आगे तैनात हैं। एलएसी पर यह तैनाती असामान्य है। तनाव को देखते हुए, भारतीय नागरिक के रूप में हमें देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। चीन के साथ संघर्ष आर्थिक चुनौती भी है। 

चीन के नाम बदलने पर भी जयशंकर ने दिया था कड़ा जवाब
हाल ही में, चीन ने अरुणाचल प्रदेश के मौजूद स्थानों के नाम बदल दिए थे। चीन के इस दावे को जयशंकर ने खारिज करते हुए कहा था कि नाम बदलने से कोई असर नहीं पड़ेगा। वे भी जानते हैं कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा था कि आज अगर मैं आपके घर का नाम बदल दूं, तो क्या वह मेरा हो जाएगा। नाम बदलने से कोई असर नहीं पड़ता है। भारतीय सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मुस्तैदी के साथ खड़ी है।  

जानें क्या है गलवान घाटी का मामला

विज्ञापन

पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद तब शुरू हुआ, जब चीनी सैनिकों ने चार स्थानों पर घुसपैठ की और भारतीय सीमा में काफी अंदर तक आ गए। मई की शुरू में चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारी वाहन, टैंक, तोपखाने और 6,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया। भारत ने भी इन स्थानों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया है। भारत की सेना ने चीनी सैन्य बल की संख्या के मुताबिक अपने सैनिकों और उपकरणों को तैनात किया है। साथ ही भारत ने चीन के विरोध के बाद भी सीमा पर अपनी परियोजनाओं को नहीं रोका।

ईरान के साथ डील पर अमेरिकी टिप्पणी पर भी दिया बयान
चीन के अलावा ईरान के साथ चाबहार समझौते से जुड़ी अमेरिका की टिप्पणी पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, लोगों को यह समझना चाहिए कि यह वास्तव में सभी के लाभ के लिए है। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि लोगों को इस पर ध्यान देना चाहिए। इसके बारे में संकीर्ण दृष्टिकोण नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने अतीत में ऐसा नहीं किया है। यदि आप अतीत में चाबहार के प्रति अमेरिका के अपने रवैये को देखें, तो अमेरिका इस तथ्य की सराहना करता रहा है कि चाबहार की व्यापक प्रासंगिकता है। इसलिए हम इस पर जरूर काम करेंगे।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें