भारत बंद के समर्थन पर प्रदर्शन करते लोग।
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किसानों ने 27 सितंबर को भारत बंद का सफल आयोजन कर केंद्र पर गहरा असर डाला है। शायद इसी का असर है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने गुजरात के किसानों की जिंदगी बदलने में सफलता पाई है। गुजरात के कच्छ जैसे इलाकों में जहां कोई खेतीबाड़ी नहीं होती, वहां पानी इत्यादि की सुविधा देने से आज पूरे साल खेती हो रही है। प्रधानमंत्री ने इशारा किया कि केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों से आने वाले दिनों में किसानों की स्थिति बेहतर होगी और आजादी के 100वें वर्ष तक उनकी स्थिति में बड़ा सुधार होगा।
वहीं, किसानों ने प्रधानमंत्री के इस बयान को भारत बंद के सफल आयोजन का असर बताया है। किसान नेता पुष्पेंद्र चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि कोई भी आंदोलन लंबे समय तक खिंचे तो इसका असर खत्म या बेहद कमजोर हो जाता है। ऐसे आंदोलन से जुड़े लोग भी छिटकने लगते हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने देखा कि 10 महीने बाद भी किसान अपनी मांगों के प्रति न केवल प्रतिबद्ध हैं, बल्कि वे और ज्यादा पुरजोर तरीके से संगठित हुए हैं। इससे सरकार को यह संदेश गया है कि बिना किसानों की मांग माने हुए अब कोई रास्ता निकलना संभव नहीं है।