फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट:  फरीदाबाद निगम ने कहा- खोरी क्षेत्र से हटाए लोगों के लिए पुनर्वास नीति तैयार

Sat, 28 Aug 2021 04:00 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास स्थल पर आपत्ति को लेकर सरकार से मांगा जवाब
  • सरकार व निगम को तीन सितंबर तक जवाब देने को कहा
  • सुप्रीम कोर्ट ने 7 जून को फरीदाबाद नगर निगम को खोरी गांव के वन क्षेत्र में स्थित करीब 10 हजार घरों को छह हफ्ते में ढहाने का आदेश दिया था
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा सरकार और फरीदाबाद नगर निगम ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि खोरी गांव में अवैध रूप से रह रहे लोगों को वहां से हटाने के बाद उनके लिए पुनर्वास नीति तैयार हो गई है। वहीं, शीर्ष अदालत ने पुनर्वास स्थलों को लेकर लोगों द्वारा जताई गई आपत्ति पर स्थानीय निकाय व राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। इस मामले पर अगली सुनवाई छह सितंबर को होगी।

विज्ञापन


जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ के समक्ष खोरी गांव के वन क्षेत्र से विस्थापित किए गए लोगों की ओर से पेश वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि उन्होंने आवेदन के साथ पुनर्वास को लेकर नवीनतम रिपोर्ट संलग्न की है। उन्होंने कहा कि सरकार व निगम की ओर से जो बयान दिए गए हैं, वे गलत हैं। इस पर पीठ ने सरकार व निगम को तीन सितंबर तक जवाब देने को कहा है।

हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल अरुण भारद्वाज ने पीठ से कहा कि पुनर्वास नीति को याचिकाकर्ता के वकीलों के सुझाव पर विचार करने के बाद ही तैयार किया गया है। याचिकाकर्ता के एक अन्य वकील संजय पारिख ने कहा कि राधास्वामी सत्संग की जमीन वन क्षेत्र में है। पारिख ने इस संबंध में वन विभाग द्वारा एनजीटी को दिए रिपोर्ट का हवाला दिया। इस पर जस्टिस खानविलकर ने कहा कि अथॉरिटी को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी करने दीजिये, हम बाद में इस मसले पर विचार करेंगे।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट कह चुका है हर हाल में खाली हो वन क्षेत्र
सुप्रीम कोर्ट ने संजय पारिख से कहा कि हम बार-बार कह रहे हैं कि वन क्षेत्र में जो भी अवैध निर्माण है, उन्हें ढहाया जाए। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने सात जून को फरीदाबाद नगर निगम को खोरी गांव के वन क्षेत्र में स्थित करीब 10 हजार घरों को छह हफ्ते में ढहाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा था कि हर हाल में वन क्षेत्र खाली होना चाहिए और इसमें कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि इसके बाद कुछ लोगों द्वारा यह दावा किया गया कि उनकी जमीन वन क्षेत्र में नहीं है, लेकिन निगम की ओर से उन्हें नोटिस मिला है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें