महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने ईडी के समक्ष पेश नहीं होने को लेकर सफाई दी। देशमुख ने सोमवार को दावा किया कि निहित स्वार्थों द्वारा एक झूठी कहानी बनाई गई कि वह मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश होने से बच रहे हैं। राकांपा नेता ने कहा कि वह निष्पक्ष अधिकारियों के सामने खुद को पेश करने के इच्छुक हैं।
ईडी के सामने पेश हुए देशमुख
सोमवार को मुंबई में ईडी के कार्यालय में प्रवेश करने के बाद जारी एक बयान में देशमुख ने दावा किया कि दुश्मनी के कारण कुछ लोगों ने मेरे खिलाफ अभियान शुरू किया है। ऐसे लोगों की कोई विश्वसनीयता, सम्मान या गौरव नहीं है। देशमुख ने कहा कि इन निहित स्वार्थों ने एक झूठी कहानी फैलाई कि मैं प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेश होने से बच रहा हूं। इस तरह का प्रचार बिल्कुल निराधार है।
राकांपा नेता ने कहा कि उन्होंने बिना किसी डर या पक्षपात के केवल पारदर्शी, निष्पक्ष जांच की मांग की है। मैं ऐसे निष्पक्ष अधिकारियों के सामने पेश होने और मेरे खिलाफ लगाए गए आरोपों के झूठ को उजागर करने के लिए उत्सुक हूं। मुझे उम्मीद है कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी निष्पक्ष तरीके से कार्य करेंगे और जांच में मेरे सहयोग के बारे में गलतफहमी को दूर करेंगे।
100 करोड़ रुपये भ्रष्टाचार आरोप का मामला
जांच एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि वे 71 वर्षीय राकांपा नेता का पीएमएलए के तहत कथित 100 करोड़ रुपये की रिश्वत मामले में आपराधिक जांच के संबंध में बयान दर्ज करेंगे। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा कथित जबरन वसूली रैकेट मामले में इस साल अप्रैल में देशमुख ने राज्य के गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
देशमुख ने इस मामले में ईडी द्वारा जारी किए गए कम से कम चार समन का जवाब नहीं दिया था, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा पिछले हफ्ते इन समन को रद्द करने से इनकार करने के बाद, वह सोमवार को एजेंसी के सामने पेश हुए। देशमुख और अन्य के खिलाफ ईडी का मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा भ्रष्टाचार दर्ज किए जाने के बाद आया है। उनके खिलाफ मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने रिश्वत के आरोप लगाए हैं।