भ्रष्टाचार वह दीमक है जो हर तंत्र का खोखला कर देता है। देश में इसके क्या हालात हैं, यह तो इसके खिलाफ काम करने वाली संस्थाओं द्वारा विभिन्न राज्यों में मारे गए छापों में अफसरों के पास मिलने वाली अकूत संपत्ति से पता चल जाता है। यह बात और है कि देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ गठित सर्वोच्च संस्था लोकपाल को कम शिकायतें मिली हैं। शनिवार को जारी अधिकृत आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जुलाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ लोकपाल को मात्र 30 शिकायतें मिली हैें।
लोगों के पास शिकायत के लिए कुछ नहीं : जितेंद्र सिंह
गौरतलब है कि बीते दिनों केंद्रीय कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को सूचित किया था कि लोकपाल को प्रस्तुत शिकायतों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में काफी कमी आई है। इससे पता चलता है कि मोदी सरकार अच्छा काम कर रही है। जनता के पास शिकायत करने के लिए शायद कुछ नहीं है।
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान जितेंद्र सिंह ने बताया था कि जहां 2019-20 में लोकपाल के पास 1,427 शिकायतें थीं, वहीं 2020-21 में यह घटकर केवल 110 रह गईं। सभी के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि लोकपाल के गठन के पहले वर्ष में उनके पास 1,000 से अधिक शिकायतें थीं, लेकिन अगले ही वर्ष यह संख्या घटकर लगभग 100 या उससे भी कम हो गईं।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि शिकायतों की संख्या काफी कम हो गई है और उत्तरोत्तर कम हो रही है। यह न केवल लोकपाल की ओर से बल्कि मोदी सरकार के लिए भी एक अच्छा उदाहरण है। शिकायत करने के लिए शायद ही कुछ है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह लोकपाल के प्रदर्शन से सरकार संतुष्ट है? मंत्री ने कहा था कि 'लोकपाल के प्रदर्शन पर टिप्पणी करना अनिवार्य नहीं है। लोकपाल सीधे राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपते हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी
मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा सदस्यों से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के लिए प्रतिबद्ध हैं। उसी प्रतिबद्धता के मद्देनजर लोकपाल की स्थापना हुई है।
क्या कहती है ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट
उधर, इसी साल जनवरी में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट जारी हुई थी। इसमें दुनिया के 180 देशों की रेैंकिंग जारी की थी। इसमे भारत का स्थान छह पायदान फिसलकर 86वें नंबर पर आ गया। जबकि 2020 में भारत 80वें स्थान पर था।
दो साल में बढ़ा भ्रष्टाचार
संस्था के अनुसार भारत की स्थिति पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के मुकाबले बहुत ठीक है, लेकिन पिछले दो साल में इसकी रैंकिंग गिरी है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2018 की रिपोर्ट में भारत 81वें स्थान पर था। 2019 की रिपोर्ट में 78वें पायदान पर था। 2020 की रिपोर्ट में 80वें पायदान पर पहुंचा और अब 2021 की रिपोर्ट में 86वें पायदान पर है।