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सिर्फ सलाह देने वाले नहीं रहेंगे PK, कांग्रेस ज्वॉइन करने की सुगबुगाहट

Wed, 22 Mar 2017 10:59 AM IST
amarujala.com- Presented by: राघवेंद्र मिश्र
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प्रशांत किशोर - फोटो : फाइल फोटो
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उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इससे पार्टी के शीर्ष जिम्मेदार नेताओं के साथ ही चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी निशाने पर हैं। पिछले दिनों लखनऊ स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में एक कार्यकर्ता ने पोस्टर लगाया था, जिसमें प्रशांत के बारे में सूचना देने वालों को पांच लाख रुपए इनाम के रूप में देने की बात लिखी गई थी। हालांकि, पार्टी आलाकमान को इसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तुरंत इसे हटवा दिया था।
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मंगलवार को पार्टी प्रवक्ता सुरजेवाला सहित कई कांग्रेस नेताओं ने ट्विटर पर प्रशांत किशोर की तारीफ में पुल बांधे। इसके साथ ही पंजाब में भारी जीत में उनके योगदान की सराहना की। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी उनकी तारीफ की। वहीं, यूपी हार के बाद प्रशांत किशोर ने अपने या कांग्रेस के चुनाव में उठाए गए गलत कदम पर कोई टिप्पणी नहीं की। इसके साथ ही आने वाले समय में पार्टी से उनका क्या रिश्ता रहेगा, इसके बारे में भी उन्होंने कुछ नहीं बताया।

नए डेवलपमेंट में एनडीटीवी ने अपने सूत्रों के अनुसार लिखा है कि दो हफ्ते के अंदर प्रशांत किशोर अपनी टीम के सीनियर सदस्यों से बात करेंगे। इसमें उनके कांग्रेस से सीधे-सीधे जुड़ने या एक इनसाइडर के तौर पर भावी सहयोग पर मंथन करेंगे। हालांकि, आई-पीएसी के एक शीर्ष अधिकारी ने एनडीटीवी से कहा, प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की खबरें पूरी तरह से प्रीमैच्योर हैं।
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यूपी में मिली करारी हार

प्रशांत किशोर की सलाह पर चलेगी कांग्रेस
प्रशांत किशोर अपने पिछले इंटरव्यू में साफ तौर पर कहते थे कि राजनीति में पूरी तरह से घुसने की उनकी अभी कोई योजना नहीं है। लेकिन, एनडीटीवी के सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के चुनाव ने उन्हें काफी कुछ सीखाया है, जहां उन्होंने एक सलाहकार के रूप में काम किया। यहां के चुनावी नतीजे में कांग्रेस को 403 में से सिर्फ सात सीटें ही मिली। 

नाम न छापने की शर्त पर एक सूत्र ने कहा, प्रशांत किशोर पर गुजरात चुनाव के लिए भी राहुल और प्रियंका को भरोसा है। जहां बीजेपी पिछले 19 साल से लगातार शासन कर रही है और कांग्रेस के लिए दूसरे राज्यों की तरह वहां भी मुसीबत की स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही दूसरे राज्यों के लिए भी कांग्रेस उनका उपयोग कर सकती है। ऐसे में देखना है कि प्रशांत क्या एक इनसाइडर के तौर पर काम करते हैं या फिर पहले की तरह ही बाहर से रणनीति बनाते दिखेंगे।
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