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लखीमपुर हिंसा का प्रभाव: ठप पड़ा भाजपा का चुनावी अभियान, अब किसानों के विरोध से निपटने के लिए बनाई जा रही रणनीति

सार

लखीमपुर में हुई हिंसा ने भाजपा की चुनावी तैयारियों पर गहरा असर डाला है। घटना के बाद से अवध क्षेत्र में पार्टी की चुनावी तैयारी लगभग ठप पड़ गई है तो पश्चिमी क्षेत्र के मेरठ प्रांत में तैयारियों पर असर पड़ा है।
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लखीमपुर खीरी हादसा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर में हुई हिंसा ने भाजपा की चुनावी तैयारियों पर गहरा असर डाला है। घटना के बाद से अवध क्षेत्र में पार्टी की चुनावी तैयारी लगभग ठप पड़ गई है तो पश्चिमी क्षेत्र के मेरठ प्रांत में तैयारियों पर असर पड़ा है। इस समय संगठन के बूथ मैनेजमेंट, शक्ति केंद्र प्रमुखों का प्रशिक्षण और जिलेवार कई कार्यक्रम चल रहे हैं। इन सभी कार्यक्रमों में बाधा पड़ गई है। 

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पार्टी का युवा मोर्चा आज 7 अक्तूबर से सदस्यता अभियान की शुरुआत करने वाला था जो दीपावली तक चलने वाला है। युवा मोर्चे की इस तैयारी में भी खलल पड़ सकती है। इधर किसान संगठनों का कहना है कि लखीमपुर मामले में किसानों पर हुई हिंसक वारदात के बाद भी भाजपा नेताओं को उनके क्षेत्रों में विरोध जारी रहेगा। माना जा रहा है कि इसके कारण यूपी के अन्य क्षेत्रों में भी भाजपा नेताओं और किसानों का टकराव देखने को मिल सकता है।

 भाजपा ने इस बार विधानसभा चुनाव में चार करोड़ पोपुलर वोट पाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पार्टी इसके लिए माइक्रो मैनेजमेंट का सहारा ले रही है। सभी विधानसभाओं के सभी बूथों पर पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति, बूथ प्रमुखों और शक्ति केन्द्रों का प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। इसके जरिए समाज के सभी वर्गों को साधने की कोशिश भी चल रही है। आज़ादी के अमृत महोत्सव पर पार्टी ने सभी विधानसभा क्षेत्रों और सभी जिलों में तिरंगा यात्रा निकालने की योजना बना रखी है जिस पर क्षेत्रवार काम चल रहा है। इसके माध्यम से युवा वर्ग को अपने साथ जोड़ने का काम कर रही है। लेकिन लखीमपुर खीरी में घटी घटना के बाद इन सभी कार्यक्रमों में व्याधान पड़ा है।
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विरोध का डर
भाजपा नेताओं को अब अपने क्षेत्रों में किसान संगठनों के विरोध का डर भी सता रहा है। पार्टी नेताओं को अब समझ में आ गया है कि किसानों का भाजपा नेताओं के विरोध की बात अब हवा-हवाई नहीं है, बल्कि यह उसके लिए बड़ा संकट बन गया है। नेताओं को आशंका है कि उनके क्षेत्रों में भी किसानों की भीड़ उन्हें प्रचार करने से रोक सकती है। अब तक शिथिल पड़े विपक्षी दलों में भी लखीमपुर की घटना के बाद जोश आ गया है।   

किसानों से निबटने की रणनीति तैयार
उत्तर प्रदेश भाजपा के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि उन्हें भी आशंका है कि कुछ क्षेत्रों में उन्हें किसानों का विरोध झेलना पड़ सकता है। लेकिन पार्टी भी विपक्ष की इस ‘चाल’ से निपटने की रणनीति बना चुकी है। नेता के मुताबिक, हमें किसानों के इस विरोध का अंदाजा था, और पार्टी बेहद शांत तरीके से किसानों के इस प्रदर्शन से निपट रही थी। पार्टी की इसी रणनीति का असर हुआ कि लखीमपुर से पहले आज तक किसानों से कहीं टकराव नहीं होने पाया।

लखीमपुर हिंसा को घटनास्थल पर किसी वरिष्ठ नेता के न होने से हुई ‘चूक’ बताते हुए नेता ने कहा कि अब आगे पार्टी बेहद शांत तरीके से किसानों के विरोध का सामना करेगी और कहीं भी अप्रिय स्थिति पैदा नहीं होने दी जाएगी। इस घटना से उपजी नकारात्मक माहौल को खत्म करने के लिए अभी से पार्टी का किसान मोर्चा विभिन्न किसान संगठनों से जुड़कर उनसे बातचीत कर रहा है। जो किसान संगठन इस आंदोलन का हिस्सा नहीं है उन्हें आगे रखकर पार्टी जनता तक अपनी बात पहुंचाने की रणनीति बना रही है। सिविल सोसाइटी के गणमान्य लोगों को आगे रखकर पार्टी अपना अभियान आगे बढ़ाएगी।

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