एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में से आठ प्रतिशत छात्र हैं। एक साल में 30,000 से अधिक लोगों की जान लेने के बराबर है। इन आंकड़ों को टीएमसी सांसद मौसम नूर ने बुधवार को संसद में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है। इस स्थिति को देखते हुए भारत की प्रवेश एवं परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।
आत्महत्या के मामले में छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। छात्रों की आत्महत्याओं के बढ़ते आंकड़े को रोकने के लिए संसद में भारत की प्रवेश एवं परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। शून्यकाल के दौरान टीएमसी सांसद मौसम नूर ने बुधवार को छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने सदन में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरों के आंकड़े प्रस्तुत किए। एनसीआरबी के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में से आठ प्रतिशत छात्र हैं, जो एक वर्ष में 30,000 से अधिक लोगों की जान लेने के बराबर है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा संकट है जिस पर तत्काल ध्यान देने और कार्रवाई करने की आवश्यकता है। सभी आत्महत्याओं में से 35 प्रतिशत 18-30 वर्ष की आयु वर्ग में की जाती हैं।
टीएमसी सांसद ने कहा, "हमारी प्रवेश एवं परीक्षा प्रणाली में विफलता स्पष्ट रूप से स्पष्ट है। 2022 में 18 वर्ष से कम आयु के 1,123 बच्चों ने परीक्षा में असफल होने के कारण अपनी जान दे दी। वहीं 1,445 युवा वयस्कों ने बेरोजगारी के कारण अपनी जान दे दी। उन्होंने कहा कि हाल के आंकड़े छात्रों के सामने आने वाली भयंकर प्रतिस्पर्धा को उजागर करते हैं।
उन्होंने बताया कि इस साल 23 लाख से ज़्यादा उम्मीदवार नीट यूजी के लिए उपस्थित हुए। जबकि एमबीबीएस की सीट सिर्फ 1.8 लाख ही थीं। वहीं 12.3 लाख छात्र जेईई मेन्स के लिए उपस्थित हुए जबकि वहां 39,767 सीट थीं। यह असमानता बहुत ज़्यादा है। उन्होंने बताया कि छात्रों की कीमत गलत तरीके से परीक्षा के नतीजों से जोड़ दी जाती है। उन्होंने कहा कि इस साल नीट, यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट और नीट पीजी की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
टीएमसी नेता ने कहा कि "हमारे देश में शिक्षा की स्थिति एक गंभीर हो गई है। हर एक छात्र की आत्महत्या एक राष्ट्रीय त्रासदी के समान है, यह अपने युवाओं का समर्थन करने में सरकार की विफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। सरकार को देश की प्रवेश और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।"