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Maharashtra: समानता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा एक परिवर्तनकारी तंत्र, गोंदिया में बोले उपराष्ट्रपति धनखड़

Sun, 11 Feb 2024 11:58 PM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोंदिया

सार

धनखड़ ने यह भी सुझाव दिया कि कृषि उपज में मूल्यवर्धन से किसानों के जीवन में गुणात्मक सुधार आएगा। आज दुनिया भारत में बदलाव देख रही है और जब नेता जमीनी हकीकत से वाकिफ हो और उसे बदलने की क्षमता रखता हो तो बदलाव अवश्यंभावी है। 
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को कहा कि समानता लाने और असमानता को कम करने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावशाली परिवर्तनकारी तंत्र है। महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विजन, मिशन और प्रतिभा वाले युवा सांसदों को 2047 के विकासशील भारत के निर्माण में बड़ी भूमिका निभानी है।

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धनखड़ ने यह भी सुझाव दिया कि कृषि उपज में मूल्यवर्धन से किसानों के जीवन में गुणात्मक सुधार आएगा। आज दुनिया भारत में बदलाव देख रही है और जब नेता जमीनी हकीकत से वाकिफ हो और उसे बदलने की क्षमता रखता हो तो बदलाव अवश्यंभावी है। आज हमारे नजदीकी केंद्र और राज्य में नेतृत्व सक्षम है ताकि बदलाव आ सके।

उपराष्ट्रपति ने आगे बताया कि भारत तेजी से एक मजबूत राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि 1989 में जब मैं पहली बार सांसद बना तो वह हमारे देश के लिए कठिन समय था। देश को अपना स्वर्ण भंडार हवाई मार्ग से स्विट्जरलैंड भेजना पड़ा, जहां इसे दो बैंकों में गिरवीं रखा गया ताकि हमारे देश की वित्तीय विश्वसनीयता कायम रह सके। उन्होंने आगे बताया, 'लेकिन अब समय बदल गया है और हम कनाडा, फ्रांस और इंग्लैंड को पीछे छोड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं'।
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आर्थिक राष्ट्रवाद से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था पैदा होंगी नौकरियां

धनखड़ रविवार को जयपुर के पास धानक्या पहुंचे थे। यहां उन्होंने आरएसएस विचारक दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर एक कार्यक्रम में कहा कि देश 2014 से पहले पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं में से एक था, अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। भारत का नाम दुनिया के उन पांच देशों में शामिल था जो दुनिया पर बोझ थे। हमने कनाडा, इंग्लैंड और फ्रांस को पीछे छोड़ दिया है।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आगे कहा कि आर्थिक राष्ट्रवाद से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और लाखों लोगों को नौकरियां मिलेंगी। इसके लिए भारतीयों को स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों का उपयोग करने का संकल्प लेना होगा।

धनखड़ ने आगे बताया, हमने उन लोगों को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने हम पर सदियों तक शासन किया। भारत अब निवेश और अवसरों के लिए पसंदीदा स्थान है। आने वाले दो-तीन वर्षों में हम निश्चित रूप से जर्मनी और जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के महत्व को रेखांकित करते हुए धनखड़ ने कहा, अगर आज भारत का नागरिक संकल्प ले कि जहां तक संभव हो सके, वे देश में निर्मित वस्तुओं का ही उपयोग करेंगे। इससे हमारा आर्थिक भंडार बढ़ेगा, करोड़ों हाथों को काम मिलेगा और एक बड़ी क्रांति आएगी।

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