संपादकों की सर्वोच्च संस्था, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने आगे कहा, देश में सरकारी एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र मीडिया को परेशान करने और डराने-धमकाने का खतरनाक चलन बंद होना चाहिए। यह हमारे संवैधानिक लोकतंत्र को कमजोर करता है। जुलाई 2021 में, देश के प्रमुख समाचार पत्र दैनिक भास्कर के कार्यालयों के साथ-साथ लखनऊ स्थित एक समाचार चैनल, भारत समाचार के कार्यालयों पर भी आयकर विभाग ने छापे मारे थे। ये छापेमारी सरकार द्वारा महामारी से निपटने के लिए दोनों समाचार संगठनों द्वारा बहुत ही महत्वपूर्ण कवरेज की पृष्ठभूमि के खिलाफ की गई थी। गिल्ड ने अपने बयान में कहा कि आयकर विभाग ने अपनी पूरी कार्रवाई को 'सर्वे' बताया है, लेकिन न्यूजलॉन्ड्री के सीईओ अभिनंदन सेखरी के बयान से पता चलता हैं कि यह उनके अधिकारों और मीडिया की आजादी पर हमला है। गिल्ड को इस बात की गहरी चिंता है कि पत्रकारों के डाटा की इस तरह की जब्ती, जिसमें कई संवेदनशील जानकारियां शामिल होती हैं, वह कार्रवाई पूरी तरह गलत है। पत्रकारों के स्रोतों का विवरण, स्टोरी को लेकर किया जा रहा काम और अन्य पत्रकारिता डेटा के साथ छेड़छाड़, यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
न्यूजलॉन्ड्री के कार्यालय में आयकर विभाग ने दूसरी बार दस्तक दी है। इससे पहले जून में भी आयकर विभाग की टीम न्यूजलॉन्ड्री के कार्यालय में पहुंची थी। न्यूजक्लिक के मामले में, प्रवर्तन निदेशालय ने फरवरी 2021 में उनके कार्यालय के साथ-साथ उनके वरिष्ठ पत्रकारों और अधिकारियों के घरों पर भी छापेमारी की थी। न्यूजक्लिक और न्यूजलॉन्ड्री दोनों ही केंद्र सरकार की नीतियों और कामकाज के आलोचक रहे हैं। गिल्ड की अध्यक्ष सीमा मुस्तफा, महासचिव संजय कपूर और कोषाध्यक्ष अनंत नाथ द्वारा जारी बयान में मांग की गई है कि ऐसी सभी जांचों में बहुत सावधानी और संवेदनशीलता दिखाई जाए। सरकार, पत्रकारों और मीडिया संगठनों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास न करे। इस तरह की जांच को स्वतंत्र मीडिया को डराने या उसका उत्पीड़न करने के साधन नहीं बनने देना चाहिए।