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ED: ईडी ने एल्गर परिषद और भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया

Wed, 10 Aug 2022 09:16 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : social media
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एल्गर परिषद और भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एनआईए की एक विशेष अदालत द्वारा बुधवार को ईडी को नवी मुंबई की तलोजा जेल में इस संबंध में आरोपी वकील सुरेंद्र गाडलिंग से पूछताछ करने की अनुमति देने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। 

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एनआईए के मामलों के विशेष न्यायाधीश राजेश जे. कटारिया ने कहा कि यदि अपराध से धन प्राप्त हुआ है तो यह जांच का विषय है और चूंकि शिकायत दर्ज कर ली गई है, गाडलिंग का बयान दर्ज किया जा सकता है।
गाडलिंग एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तारी के बाद 2018 से न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने एल्गार परिषद मामले में एनआईए द्वारा दर्ज की गई पहली सूचना रिपोर्ट के आधार पर पिछले साल धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था।
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ईडी ने अदालत को बताया कि गाडलिंग मामले में मुख्य आरोपी हैं और वह उनका बयान दर्ज करना चाहती है। संघीय जांच एजेंसी ने दावा किया कि गाडलिंग भाकपा (माओवादी) के सक्रिय सदस्य थे और उन्हें प्रतिबंधित संगठन के लिए धन जुटाने और धन के वितरण में शामिल होने का संदेह था।

वरवरा राव को मिली जमानत 
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज (10 अगस्त)  2018 में हुई महाराष्ट्र की भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले के आरोपी कवि वरवरा राव को स्वास्थ्य के आधार पर नियमित जमानत दे दी। इससे पहले उन्हें अंतरिम जमानत दी गई थी। अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदलने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने शर्त रखी कि राव ट्रायल कोर्ट की मंजूरी बिना शहर नहीं छोड़ें। राव गवाहों से संपर्क करने की कोशिश न करें। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने 83 साल के बुजुर्ग कवि राव की याचिका ठुकरा दी थी। राव ने बॉम्बे हाईकोर्ट से खराब स्वास्थ्य के आधार पर नियमित जमानत मांगी थी, जिसे उसने 13 अप्रैल को खारिज कर दी थी। इसके बाद राव ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 

वरवरा राव को 28 अगस्त, 2018 को हैदराबाद में उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। उनके व अन्य के खिलाफ भीमा कोरेगांव मामले में पुणे पुलिस ने 8 जनवरी, 2018 को विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया था। यह केस भादंवि की विभिन्न धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दायर किया गया था। 

क्या है मामला? 
यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एलगार परिषद के सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है। इसके अगले दिन पुणे के बाहरी इलाके में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा हुई थी। पुणे पुलिस ने यह भी दावा किया था कि यह सम्मेलन कथित माओवादी संपर्क वाले लोगों ने आयोजित किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। 

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