प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को 500 करोड़ रुपये के धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले के संबंध में अवंता समूह के प्रमोटर गौतम थापर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। ईडी ने अंतिम रिपोर्ट विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल के सामने प्रस्तित की। अदालत इस मामले पर सुनवाई चार अक्तूबर को करेगी। थापर को ईडी ने अगस्त में गिरफ्तार किया था और फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
इसके साथ ही अदालत ने थापर की जमानत याचिका को आगे की दलीलों के लिए 7 अक्तूबर के लिए स्थगित कर दिया। इस मामले में 27 सितंबर को हुई पिछली सुनवाई में अदालत ने ईडी से थापर की जमानत याचिका पर एक अक्तूबर तक जवाब देने को कहा था। थापर की ओर से दायर की गई जमानत याचिका में दावा किया गया है कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की और जरूरत नहीं है।
यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर के साथ लेन-देन की जांच कर रही है ईडी
इस याचिका में दावा किया गया है कि इस बात की कोई संभावना नहीं है कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित कर सकता है। ईडी, गौतम थापर की कंपनी अवंता रियल्टी और यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर व उनकी पत्नी के साथ हुए लेनदेन की जांच कर रही है। ईडी ने धन शोधन का यह मामला सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर का संज्ञान लेते हुए दर्ज किया था।
हाईकोर्ट ने गुरुवार को खारिज की थी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को थापर की एक याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया था। थापर ने तर्क दिया था कि मुझे कानूनी रूप से अनिवार्य 24 घंटे की समय सीमा समाप्त होने के बाद निचली अदालत में पेश किया गया था। इससे पहले पांच सितंबर को निचली अदालत ने भी गौतम थापर की इस तर्क पर आधारित जमानत याचिका खारिज कर दी थी।