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Tamil Nadu: विदेश में रखी आपराधिक संपत्तियों के खिलाफ वैध घरेलू संपत्ति जब्त कर सकता है ED, मद्रास HC का फैसला

Wed, 02 Oct 2024 05:49 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति वी शिवगनम की खंडपीठ ने मंगलवार को एक आदेश जारी करते हुए कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 2(1)(यू) के तहत यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि देश या विदेश में रखी गई ऐसी किसी भी संपत्ति या उसके बराबर मूल्य की संपत्ति का मूल्य भी अपराध की आय के रूप में माना जाएगा।
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मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत और देश के आर्थिक हित में आपराधिक गतिविधियों के जरिए विदेश में बनाई गई संपत्तियों के खिलाफ देश में उपलब्ध समान मूल्य की वैध संपत्तियों को जब्त कर सकता है।
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तीन कंपनियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान फैसला
मद्रास हाई कोर्ट ने चेन्नई में मौजूद तीन कंपनियों की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान ये फैसला दिया, जिसमें तर्क दिया गया था कि उन्हें उनसे जुड़े व्यक्तियों और शेयरधारकों की तरफ से किए गए कथित अपराधों के लिए प्रतिरूपी रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है और संघीय जांच एजेंसी की तरफ से जब्त की गई उनकी संपत्तियां उनसे जुड़े कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी अपराध के बहुत पहले खरीदी गई थीं।

पीएमएलए की धारा से स्पष्ट है मामला
न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति वी शिवगनम की खंडपीठ ने मंगलवार को एक आदेश जारी करते हुए कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 2(1)(यू) के तहत यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि देश या विदेश में रखी गई ऐसी किसी भी संपत्ति या उसके बराबर मूल्य की संपत्ति का मूल्य भी अपराध की आय के रूप में माना जाएगा। इसलिए, इस धारा के तहत बताई गई परिस्थितियां यह हैं कि किसी व्यक्ति की तरफ से अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप अर्जित की गई किसी भी संपत्ति को अपराध की आय माना जा सकता है। ऐसी किसी भी संपत्ति का मूल्य या यदि ऐसी संपत्ति देश के बाहर ली गई है या रखी गई है, तो देश के भीतर रखी गई संपत्ति के बराबर मूल्य को अपराध की आय के रूप में माना जा सकता है।
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उच्च न्यायालय ने अपने 14-पृष्ठ के आदेश में कहा- इसलिए, आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप कुछ संपत्ति देश के बाहर रखी जाती है, तो देश के भीतर रखी गई संपत्ति के बराबर मूल्य को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त किया जा सकता है। पीठ ने कहा इस प्रावधान का उद्देश्य देश के आर्थिक हितों की रक्षा करना होगा। अदालत ने कहा कि देश के भीतर जब्त की गई संपत्ति जरूरी नहीं है कि वह अपराध या आपराधिक गतिविधि की आय से खरीदी गई संपत्ति हो।

इसने कहा इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के बाहर की गई आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप अर्जित संपत्ति। अदालत ने फैसला सुनाया कि पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी जब्त की जा सकती है, अगर अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि देश के बाहर ली गई है या रखी गई है।

अदालत ने कंपनियों के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि उन्हें धन शोधन निरोधक कानून की धारा 70 के तहत अपने प्रमोटरों या शेयरधारकों के कृत्यों के लिए प्रतिनिधि रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है, जबकि अदालत ने उनसे पीएमएलए के अपीलीय न्यायाधिकरण से संपर्क करने और गुण-दोष, दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर अपना बचाव स्थापित करने के लिए कहा। अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी, लेकिन कहा कि मामले की सुनवाई इन टिप्पणियों से अप्रभावित रहेगी।
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