नशे के सौदागरों का पता लगाने एवं इंटेलिजेंस जुटाने के लिए सर्विलांस असिस्टेंट के दो पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। 18 अगस्त को दो पद भरने के लिए सर्कुलर जारी किया गया। इसके अतिरिक्त स्टेनो ग्रेड वन, ग्रुप सी के तहत आने वाले 21 सिपाही के पद भी सात-आठ माह से खाली पड़े हैं। खास बात ये है कि इन पदों के लिए आयु सीमा भी 56 साल रखी गई है। स्टाफ कार चालक के सात पद खाली हैं। स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर और 93 जूनियर इंटेलिजेंस अफसरों के पद खाली पड़े हैं। जुलाई 2021 से 10 इंटेलिजेंस अफसरों के पद नहीं भरे जा सके हैं। यहां बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 19 अगस्त को एडीजी रैंक में 14 आईपीएस को इम्पैनलमेंट सूची में शामिल किया था। छह सितंबर को दो आईपीएस मुकुल गोयल और वीके भावरा को केंद्र में डीजी या उसके समकक्ष इम्पैनल किया गया। 11 फरवरी को 29 आईपीएस को डीजी एवं उसके समकक्ष पदों के लिए इम्पैनल किया था। इसी साल चार फरवरी को 13 आईपीएस को एडीजी या उसके समकक्ष पदों के लिए इम्पैनल किया गया था। पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद कहते हैं, जब इतनी संख्या में योग्य आईपीएस मौजूद हैं तो सरकार को उनमें से किसी अधिकारी को डीजी नियुक्त करना चाहिए था। ये सरकार की गलती है। स्थायी डीजी न होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, आखिर क्या कारण है कि पिछले 18 महीने में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का कोई पूर्णकालिक महानिदेशक नहीं बनाया जा सका। ये सबसे महत्वपूर्ण विभाग है, जो मादक पदार्थों पर निगरानी रखता है। डेढ़ साल तक कोई पूर्णकालिक महानिदेशक न होना, सवाल खड़े करता है। क्या केंद्र सरकार ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को अपनी खुदरा राजनीति का माध्यम बना दिया है। रणदीप सुरजेवाला ने इस बाबत बुधवार को पीएम मोदी से सवाल पूछे हैं। 1,75,000 करोड़ रुपये की 25,000 किलो ड्रग्स कहां गई, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, डीआरआई, ईडी, सीबीआई, आईबी, क्या सोए पड़े हैं या फिर उन्हें मोदी जी के विपक्षियों से बदला लेने से फुर्सत नहीं है। क्या यह सीधे-सीधे देश के युवाओं को नशे में धकेलने का षड़यंत्र नहीं। क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं, क्योंकि यह इस ड्रग्स के तार तालिबान और अफगानिस्तान से जुड़े हैं। क्या ड्रग माफिया को सरकार में बैठे किसी सफेदपोश का और सरकारी एजेंसियों का संरक्षण प्राप्त है। अडानी मुंद्रा पोर्ट की जांच क्यों नहीं की गई। क्या प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार, देश की सुरक्षा में फेल नहीं हो गए हैं। क्या ऐसे में पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज का कमीशन बना कर जांच नहीं होनी चाहिए।