'एक्टिव' कवच से होंगे लैस
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (DRDO) देश के दो मुख्य युद्धक टैंकों टी-72 और टी-90 के लिए एक खास एडवांस 'कवच' सिस्टम बना रहा है। जिसका उद्देश्य टैंकों और आर्मर्ड पर्सनल कैरियर्स (APC) पर लगीं स्टील प्लेटों को नई तकनीक से बदला जाएगा। बता दें कि भारतीय सेना की 65 आर्मर्ड (बख्तरबंद) रेजिमेंटों के पास 3500 से ज्यादा स्वदेशी अर्जुन और रूसी डिजाइन वाले टी-72 और टी-90 टैंक हैं। डीआरडीओ इन टैंकों में 'एक्टिव' कवच से लैस करने की योजना बना रहा है।
मेक इन इंडिया पहल के तहत बनाई योजना
सूत्रों ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध में जिस तरह से टैंकों पर ड्रोन और एंटीटैंक गाइडेड मिसाइलों (ATGM) से टैंकों को निशाना बनाया गया है, वह वाकई चिंताजनक है। जिसके बाद मुख्य युद्धक टैंकों को ऐसे हमलों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए योजना बनाई गई। जिसकी जिम्मेदारी डीआरडीओ को दी गई है। खास बात यह होगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत इन्हें मॉडर्नाइज किया जाएगा। इस डीआरडीओ के स्वदेशी तकनीक को विकसित करने की वजह भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और आयात पर देश की निर्भरता कम करना है।
मिसाइल हमले को बेअसर करेगा सेंसर
सूत्रों ने बताया कि नए कवच पर काम शुरू हो चुका है। इस कवच में ऐसे सेंसर लगाए जाएंगे, जो हवा से या जमीन से मार करने वालीं एंटी-टैंक मिसाइल का पता लगाएंगे। वहीं, जैसे ही सेंसर को खतरा नजर आएगा, वह प्रतिक्रिया करना शुरू कर देगा। एंटी-टैंक मिसाइल को बेअसर करने के लिए यह सेंसर हथियार लॉन्च करेगा। सूत्रों ने बताया कि यह सिस्टम टैंकों, एपीसी, और रूसी मूल की बीएमपी पर लगाया जा सकता है। इसके अलावा नए फ्यूचरिस्टिक इन्फैट्री व्हीकल्स पर भी फिट किया जा सकता है। वहीं, इस सिस्टम के लगाए जाने से न केवल टैंकों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि उनमें बैठे जवानों की जान की भी रक्षा होगी। हालांकि टैंकों में भी छोटे-मोटे हमलों को झेलने के लिए कई तरह के सिस्टम होते हैं, इनमें स्टील प्लेटें भी महत्वपूर्ण हैं। लेकिन यह इंटेलिजेंट कवच सिस्टम ज्यादा बेहतर तरीके से टैंकों की सुरक्षा करेगा।
टी-72 और टी-90 टैंकों को अपग्रेड करने की तैयारी
इससे पहले टी-72 को अपग्रेड करने के लिए 2300 करोड़ रुपये की योजना के तहत 1000 टैंकों में नए स्वदेशी रूप से विकसित 1000 एचपी के इंजन लगाने का फैसला किया गया था, जो मौजूदा 780 एचपी इंजनों से ज्यादा ताकतवर होंगे। इसके अलावा उनमें रात के समय युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए थर्मल साइट, फायर डिटेक्शन सिस्टम के साथ कम्यूनिकेशन एंड बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम लगाने का फैसला किया गया था। जबकि टी-90 टैंकों में ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकर, फायरिंग एक्यूरेसी बढ़ाने के लिए डिटिजल बैलिस्टिक कंप्यूटर और कमांडर थर्मल इमेजर लगाने की बात कही गई थी।