रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख समीर वी. कामत ने कहा कि पहले युद्ध जमीन, वायु और समुद्र में लड़े जाते थे। लेकिन अब साइबर, सूचना और अंतरिक्ष क्षेत्र भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने बताया कि जिन देशों के पास इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता होगी, वे भविष्य की लड़ाइयों में बढ़त हासिल करेंगे।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष एक ऐसा महत्वपू्र्ण क्षेत्र है, जिसमें देश को अपनी विशेषज्ञता और तकनीकी क्षमताएं बढ़ानी होंगी। उन्होंने कहा कि इससे देश की जरूरतें से तेजी से पूरी की जा सकेंगी। कामत ने बताया कि उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहीं स्टार्ट-अप कंपनियों से बातचीत की है और ये कंपनियां नागरिकों के इस्तेमाल के लिए विकसित की गई तकनीकों को सैन्य उपयोग में भी काम में ला सकती हैं। डीआरडीओ प्रमुख ने उम्मीद जताई कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश से देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जा सकेगा।
वहीं, निबे लिमिटेड ने आज कई साझेदारों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन साझेदारों में थेल्स एलेनिया स्पेस, लार्सन एंड टुब्रो, सेंटी, अग्निकुल, स्काईरूट, स्पेसफील्ड्स, सिसिर और साइरान शामिल हैं। इन समझौतों के तहत भारत का पहली मल्टी सेंसर, ऑल वेदर अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट कंस्टीलेशन स्थापित किया जाएगा।
निबे लिमिटेड ने कहा कि वह रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए योगदान देगा और उसका अगले एक दशक में एक प्रमुख रक्षा और अंतरिक्ष कंपनी बनने का लक्ष्य है।