मुंबई की सत्र अदालत द्वारा कलाकार चिंतन उपाध्याय को अपनी पत्नी और उसके वकील हरेश भमबानी की हत्या करने के आरोप में अपराधी ठहराया गया है। अब उन्होंने शनिवार को अदालत में कहा कि उनकी 'अंतरात्मा' साफ है। उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे 'दया की मांग' नहीं कर रहे हैं, अदालत जो भी सजा तय करेगी वे उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। बता दें कि आज अदालत ने उनकी सजा की अवधि पर दलीलें सुनीं।
बता दें कि अदालत ने कलाकार चिंतन उपाध्याय को मामले में अपराधी ठहराया है। उम्मीद है कि अदालत 10 अक्तूबर को सजा पर फैसला करेगी।
इंस्टालेशन आर्टिस्ट हेमा उपाध्याय और भमबानी की हत्या 11 दिसंबर 2015 में हुई थी। हत्या के बाद उनके शव को कार्टन के बक्से में भर दिया गया था। दोनों का शव मुंबई के कांदिवली इलाके के पास पाया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसवाई भोसले ने चिंतन उपाध्याय को पांच अक्टूबर को अपनी पत्नी को मारने के लिए उकसाने और साजिश रचने का दोषी ठहराया था।
चिंतन उपाध्याय को आईपीसी की धारा 120 (बी) (आपराधिक साजिश) और 109 (उकसाने) के तहत दोषी पाया गया। दोषी ठहराए जाने के बाद जमानत पर बाहर आए कलाकार को शनिवार तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। उनके अलावा अन्य आरोपी विजय राजभर, प्रदीप राजभर, शिवकुमार राजभर और अजाद राजभर को भी दोषी करार दिया गया है। ये तीनों फरार आरोपी आर्ट फैब्रिकेटर विद्याधर राजभर के साथ काम करते थे।
शनिवार को दोषियों की सजा पर दलीलें सुनने से पहले अदालत ने दोषियों से पूछा कि क्या उन्हें फैसले पर कुछ कहना है। इस पर चिंतन ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मेरी अंतरात्मा साफ है, मैंने कोई अपराध नहीं किया है। मैं निर्दोष हूं। हालांकि, अदालत ने मुझे दोषी पाया है, कोई दया नहीं दिखाई जानी चाहिए। अदालत जो भी सजा तय करेगी, मैं उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हूं।
इस दौरान, विशेष लोक अभियोजक वैभव बागड़े ने आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग की। उपाध्याय के बयान पर वकील ने कहा कि आरोपी द्वारा अपनाया गया रुख संबंधित अपराध को करने के उसके 'दृढ़ संकल्प' को दर्शाता है। बागडे ने कहा, यह नृशंस और सोची-समझी हत्या थी। इसके लिए मौत की सजा दी जानी चाहिए।