मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल ने कहा कि हमारी कोशिश है कि न्याय हो, लेकिन हमें जांच एजेंसी न बनाएं। हम याद दिलाना चाह रहे हैं कि हम संवैधानिक अदालत हैं।
गुजरात यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों पर हमले के मामला में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी बनाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सभी घटनाओं के लिए पीआईएल की आवश्यकता नहीं है। मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और जस्टिस अनरुद्ध पी मेई की खंडपीठ ने घटना पर स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले को देखेगी।
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मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल ने कहा, "हमारी कोशिश है कि न्याय हो, लेकिन हमें जांच एजेंसी न बनाएं। हम याद दिलाना चाह रहे हैं कि हम संवैधानिक अदालतें हैं। अगर ऐसा कोई मामला आएगा तो हम जरूर संज्ञान लेंगे, लेकिन ये उनमें से एक नहीं है।"
उन्होंने कहा कि राज्य में होनी वाली सभी घटनाएं पीआईएल का मामला नहीं है। हमें पुलिस इंस्पेक्टर न बनाएं। हम जांच अधिकारी नहीं है। जब वकील केआर कोष्ठी ने कहा कि पुलिस ने एफआईआर में सभी धाराओं को शामिल नहीं किया है, जिसपर कोर्ट ने उनसे कानूनी उपाय करन को कहा।
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बता दें कि इस मामले में पुलिस ने 20-25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और मामले की जांच के लिए नौ टीमों का गठन किया गया है। पुलिस ने अबतक पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। श्रीलंका और तजिकिस्तान के दो छात्र फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।
क्या था पूरा मामला
रमजान में रात के समय उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका के छात्र अपने कमरों में नमाज अदा कर रहे थे, जब लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर इसका विरोध किया और धार्मिक नारे लगाए। इससे दोनों गुटों के बीच कहासुनी हो गई। मामला बाद मारपीट तक पहुंच गया। इस झगड़े में पांच विदेशी छात्र घायल हो गए। यह घटना गुजरात विश्वविद्यालय के ब्लॉक ए में हुई जहां विदेशी छात्र रहते हैं।