दिवाली के मौके पर रोशनी और मिठाइयों के उल्लास के अलावा पटाखे जलाने की सनक भी हावी होती है। अदालतों के अंकुश के बावजूद अधिकांश शहरों में हजारों-लाखों रुपये के पटाखे जलाए जाते हैं। इनसे निकलने वाली आवाज कितनी विचलित करने वाली हो सकती है, इसका अंदाजा आवाज फाउंडेशन की रिपोर्ट से होता है। आवाज का कहना है कि मुंबई में दिवाली-2023 के दौरान अधिकतम शोर स्तर 117 डेसिबल दर्ज किया गया। ये स्तर पिछले साल 109 डेसिबल था।
जमकर फोड़े गए "सीरियल" और "हवाई" बम
खबर के मुताबिक मुंबई के कई हिस्सों में दिवाली समारोह के दौरान शोर का स्तर पिछले साल की तुलना में अधिक पाया गया। अदालत ने पटाखों पर अंकुश के लिए समय निर्धारित किया था, लेकिन कई इलाकों में रात 10 बजे की समय सीमा के बाद भी पटाखे फोड़े गए। ध्वनि प्रदूषण को लेकर जागरूकता फैलाने के साथ-साथ इस विषय पर विशेषज्ञता रखने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने सोमवार को कहा, रात 9:55 बजे दक्षिण मुंबई के मरीन ड्राइव पर डेसीबल का स्तर 82 और 117 के बीच चरम पर था, सैर के दौरान मौजमस्ती करने वालों की एक बड़ी भीड़ ने "सीरियल" और "हवाई" बम फोड़े।
निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर मुंबई पुलिस की सख्ती
गौरतलब है कि देशभर में रविवार को रोशनी और पटाखों के साथ पारंपरिक धूमधाम और उत्साह के साथ दिवाली मनाई गई। आवाज फाउंडेशन की संस्थापक सुमैरा अब्दुलाली ने बताया, पुलिस ने रात 10:10 बजे के बाद ही पटाखे फोड़ना बंद कराना शुरू कर दिया था। इस संबंध में निर्देशों का पालन नहीं करने पर कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया। आवाज फाउंडेशन के मुताबिक मरीन ड्राइव पर रात 9 बजे के बाद पटाखे फोड़ना बढ़ गया। शिवाजी पार्क में, शाम लगभग 7.45 बजे पटाखों का उपयोग देखा गया। कुछ दूर के पटाखों को छोड़कर, शिवाजी पार्क (दादर में) से मरीन ड्राइव तक सड़क पर कुछ पटाखों का उपयोग किया गया था।
अलग-अलग इलाकों में शोर का स्तर
आवासीय क्षेत्र शिवाजी पार्क में शोर का स्तर शाम 7.45 बजे 99 डेसिबल और रात 11.45 बजे 95 डेसिबल दर्ज किया गया। 2021 में दिवाली के दौरान, यहां उच्चतम शोर स्तर, 100.4 डेसिबल दर्ज किया गया था। एनजीओ आवाज की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल, 2020 के बाद की अवधि की तुलना में कुल मिलाकर कम हवाई पटाखे फोड़े गए, लेकिन तेज आवाज वाले पटाखों के फटने से कई बिंदुओं पर डेसिबल का स्तर बढ़ गया।
806 लोगों के खिलाफ 784 मामले दर्ज
मुंबई पुलिस ने पटाखों और वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों के उल्लंघन के लिए 806 लोगों के खिलाफ 784 मामले दर्ज किए हैं। इन 806 व्यक्तियों में से 734 व्यक्तियों के विरूद्ध दंडात्मक कार्यवाही की गई।
प्रतिबंधित रसायन वाले पटाखों का भी इस्तेमाल
बता दें कि शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि महानगर और कई अन्य प्रमुख शहरों में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के मद्देनजर राज्य में केवल रात 8 बजे से 10 बजे के बीच ही पटाखे फोड़े जा सकते हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार जहरीले रसायनों वाले किसी भी पटाखे के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। रासायनिक विश्लेषण के मुताबिक पटाखों में बेरियम भी शामिल था, जो शीर्ष अदालत ने प्रतिबंधित रसायन माना है।"
खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स का कारण
आवाज फाउंडेशन का कहना है कि दिवाली के बाद की अवधि में हवा में बेरियम सहित ये हानिकारक रसायन शामिल होंगे और खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में योगदान देंगे। ध्वनि प्रदूषण के मामले में इस फाउंडेशन का कहना है कि एक दशक में पहली बार, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आवाज फाउंडेशन ने अपने शोर के स्तर को निर्धारित करने के लिए दिवाली पूर्व संयुक्त पटाखों का वार्षिक परीक्षण (pre-Diwali joint firecracker testing) नहीं किया।