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धर्मशाला : निर्वासित नेता पेमा सेरिंग ने कहा- तिब्बतियों को लेकर चीन के दावे सच्चाई से दूर 

Sun, 03 Oct 2021 02:43 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, धर्मशाला

सार

भारत में निर्वासित तिब्बत सरकार के नेता पेमा सेरिंग ने कहा, पिछले 70 वर्षों में, चीनी सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास और विकास के नाम पर तिब्बत के अंदर तिब्बतियों को लगातार अपने अधीन कर लिया है। उन्होंने कहा, तिब्बतियों का उत्पीड़न इस क्षेत्र को चीन के साथ एकीकृत करने के लिए एक राजनीतिक उपकरण के रूप में किया जाता है। 
 
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सिक्योंग पेमा सेरिंग - फोटो : social media
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विस्तार
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चीन के राष्ट्रीय दिवस से ठीक पहले भारत में निर्वासित तिब्बत सरकार ने बीजिंग के उस दावे को अस्पष्ट व ऐतिहासिक तथ्यों से परे बताया जिसमें चीन ने कहा कि सीपीसी (चीनी कम्युनिस्ट पार्टी) के शासन के 70 साल में तिब्बतियों के जीवन में सुधार आया है। तिब्बत के निर्वासित नेता सिक्योंग पेमा सेरिंग ने मई में जारी चीनी श्वेत पत्र में चीनी दावों का जोरदार खंडन किया है।

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निर्वासित नेता पेमा सेरिंग ने किया 70 साल  के चीनी उत्पीड़न पर पुस्तक का विमोचन
बता दें कि मई में जारी चीन के श्वेत पत्र 1951 से ‘तिब्बत : मुक्ति, विकास और समृद्धि’ में तिब्बतियों की खुशहाली के कई दावे किए गए हैं। लेकिन रेडियो फ्री एशिया ने निर्वासित नेता सेरिंग के हवाले से बताया कि यह मुक्ति के 70 साल नहीं बल्कि वास्तव में दमन और उत्पीड़न के सत्तर वर्ष हैं। निर्वासित नेता ने ‘तिब्बत : 70 वर्ष का शासन और उत्पीड़न’ नामक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में यह टिप्पणी की।

पेमा सेरिंग ने कहा, पिछले 70 वर्षों में, चीनी सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास और विकास के नाम पर तिब्बत के अंदर तिब्बतियों को लगातार अपने अधीन कर लिया है। उन्होंने कहा, तिब्बतियों का उत्पीड़न इस क्षेत्र को चीन के साथ एकीकृत करने के लिए एक राजनीतिक उपकरण के रूप में किया जाता है। 
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चीनी उत्पीड़न का दुनिया भर में विरोध
तिब्बत में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति को लेकर कुछ दिनों पहले स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन (टीसीएसएल) के तिब्बती समुदाय ने भी चीन के विरोध में शांति मार्च का आयोजन किया था। 24 सितंबर को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के भवन तक यूएनएचआरसी उच्चायुक्त के कार्यालय तक रैली भी निकाली गई। दुनिया भर में तिब्बतियों पर चीनी उत्पीड़न का विरोध किया जा रहा है।

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