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S Jaishankar: लाल सागर में हमलों के बीच बोले जयशंकर- कई संपर्क गलियारों की जरूरत, IMEC को लेकर कही ये बात

Tue, 20 Feb 2024 10:26 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

S Jaishankar: विदेश मंत्री एश जयशंकर ने कहा कि आज संपर्क के लिए कई सहायक गलियारे बनाने की जरूरत है। यह जरूरी है क्योंकि इसके दोनों छोर (यूरोप और भारत) वास्तव में दो बड़े उत्पादन और खपत केंद्र हैं। 
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विदेश मंत्री एस जयशंकर। - फोटो : एक्स/डॉ.एस.जयशंकर
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विस्तार
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि लाल सागर के हालिया घटनाक्रमों ने मौजूदा संपर्क (कनेक्टिविटी) की नाजुकता की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि आज कई परिवहन गलियारे बनाने की जरूरत है। जयशंकर ने एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यूरोप और भारत के गहरे होते संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महत्वकांक्षी आईएमईसी पहल वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के मौके पैदा करेगी। 

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जयशंकर ने कई संपर्क गलियारे बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले साल सितंबर में जब भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की घोषणा की गई थी, मौजूदा मार्गों की नाजुकता स्पष्ट नहीं थी। विदेश मंत्री ने कहा, पिछले साल सितंबर में जब आईएमईसी को लेकर सैद्धांतिक सहमति बनी थी, तब शायद हम सभी मौजूदा संपर्क की नाजुकता से पूरी तरह वाकिफ नहीं थे। आईएमईसी की घोषणा जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।  

विदेश मंत्री सीआईआई की ओर से आयोजित सम्मेलन में 'भारत और यूरोप: विकास एवं वहनीयता' (इंडिया एंड यूरोप: पार्टनर्स इन ग्रोथ एंड संस्टेंनिबिलिटी) विषय पर बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि अदन की खाड़ी में लाल सागर में हाल की घटनाओं ने हमें इसकी (आईएमईसी) याद दिला दी है। 

गाजा में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में हूती विद्रोहियों की ओर से लाल सागर और क्षेत्र के अन्य रणनीतिक जलमार्गों में विभिन्न मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। जिससे वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं। जयशंकर ने कहा, आज संपर्क के लिए कई सहायक गलियारे बनाने की जरूरत है। यह जरूरी है क्योंकि इसके दोनों छोर (यूरोप और भारत) वास्तव में दो बड़े उत्पादन और खपत केंद्र हैं। आईएमईसी को चीन की बेल्ट और रोड पहल (बीआरआई) के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। इसके एक समान विचारधारा वाले उन देशों को एक साथ लाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि आईएमईसी एकमात्र गलियारा नहीं और अन्य भी हैं। जयशंकर ने कहा, यह एक लंबा काम है, जिस पर ईरान के जरिए काम किया जा रहा है। लेकिन मैं कुछ अन्य संभावित संपर्क चैनलों की भी बात करना चाहता हूं, जो भारत और यूरोप के दीर्घकालिक हित में होंगे। जयशंकर ने भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना का हवाला दिया और कहा कि यह बड़ी संपर्क परियोजनाओं के लिए उदाहरण हो सकता है। उन्होंने ध्रुवीय मार्ग के बारे में भी बात की। 
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रूस-यूक्रेन के बीच मध्यस्थता निभाने को लेकर दिया संकेत
जयशंकर ने इसका भी संकेत दिया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का खत्म कराने के लिए भारत मध्यस्थ की भूमिका निभाने पर विचार करने के लिए तैयार है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली को नहीं लगता कि उसे अपने दम पर कुछ भी पहल नहीं करनी चाहिए। जर्मनी के दैनिक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में भारत के उर्जा आपूर्तिकर्ताओं ने यूरोप को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को प्राथमिकता दी, जो अधिक कीमत चुकाते हैं और भारत के पास रूस से कच्चा तेल खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। 

भारत और फ्रांस के रिश्तों पर बातचीत
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की भूमिका के अलावा विदेश मंत्री डॉ जयशंकर ने फ्रांस के सीनेट प्रमुख के साथ की रणनीतिक भागीदारी पर भी चर्चा की। उन्होंने मंगलवार को दौरे पर आए फ्रांसीसी सीनेट के अध्यक्ष जेरार्ड लार्चर के साथ भारत और फ्रांस के बीच रिश्तों पर विस्तार से बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच कई वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर पर भी वार्ता हुई। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, फ्रांसीसी सीनेट के अध्यक्ष जेरार्ड लार्चर के नेतृत्व में दौरे पर आए संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मिलकर खुशी हुई। इसमें रणनीतिक साझेदारी के अलावा कई वैश्विक मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई। दो दिन के दौरे पर आए लार्चर ने सोमवार को संसद भवन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से भी मुलाकात की थी। उन्होंने द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा कई रणनीतिक पहलुओं पर बातचीत की। 
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