सिर्फ जांच के बाद ही देना जरूरी
पल्मोनरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत मोहन का कहना है कि विटामिन डी या फिर मल्टी विटामिन दवाएं उन मरीजों की दी जाती हैं जिनमें इनकी कमी होती है। यह सर्वविदित है कि अधिकांश आबादी को एक समय बाद इन विटामिन की कमी शरीर में आती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ये आबादी कोविड संक्रमित हुई तो इन्हें विटामिन लेना चाहिए। यह बिलकुल ही गलत है। जब एक मरीज किसी डॉक्टर के पास आता है फिर चाहे वह कोविड संक्रमित हो या फिर गैर कोविड। सबसे पहले जरूरी है कि उसकी जांच की जाए।
दो साल में करोड़ों का कारोबार
देश की 8.50 लाख दवा दुकानों को लेकर ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के सर्वेक्षण से पता चला है कि साल 2020 में कोरोना बीमारी से बचने के लिए देश में विटामिन सी की 185 करोड़ गोलियां बिकीं, जो साल 2019 की तुलना में करीब 100 फीसदी बढ़ोतरी है। साल 2020 में विटामिन सी सप्लीमेंट की बिक्री 110 फीसदी रही, जो साल 2019 में 4.7 फीसदी थी। एबॉट हेल्थकेयर की लिमसी और कोए फार्मा की सेलिन सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड थे।