रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) की सराहना करते हुए कहा कि यह बड़ा कदम है, जिससे भारत जल्द ही घरेलू रक्षा जरूरतों के लिहाज से आत्मनिर्भर हो जाएगा। साथ ही पूरी दुनिया के लिए रक्षा उत्पाद बनाने की क्षमता भी हासिल कर लेगा। मंगलवार को उन्होंने नागपुर स्थित एक निजी फर्म की तरफ से निर्मित मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड (एमएमएचजी) का पहला बैच भारतीय सेना को सौंपा।
भारत का रक्षा निर्यात बीते दो वर्ष में 17 हजार करोड़ पार हुआ
इस दौरान उन्होंने कहा, भारत का रक्षा निर्यात बीते दो वर्ष में 17 हजार करोड़ रुपये पार कर गया है। रक्षा विनिर्माण के लिहाज से यह सावर्जनिक और निजी क्षेत्र के बीच बढ़ते सहयोग का आदर्श उदाहरण है। यह प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में भी मददगार है।
प्रथम विश्वयुद्ध के दौर के ग्रेनेड्स की जगह लेंगे नए ग्रेनेड, जवान रहेंगे सुरक्षित
एमएमएचजी का उत्पादन रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला की तरफ से किए गए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के बाद इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव लिमिटेड (ईईएल) की तरफ से किया गया है। एमएमएचजी प्रथम विश्वयुद्ध के दौर से काम आ रहे ग्रेनेड की जगह लेंगे, जो ज्यादा प्रभावी और सेना के लिए सुरक्षित हैं।
कुल 10 लाख ग्रेनेड मिला है आदेश, दो वर्ष में पूरी होगी आपूर्ति
सेना और वायु सेना को 10 लाख आधुनिक हैंड ग्रेनेड दो साल में मिल जाएंगे। ईईएल को इसके उत्पादन की मंजूरी मार्च, 2021 में दी गई थी, जिसके महज पांच माह के भीतर पहली खेप मिल गई है। इस अवसर पर सेनाध्यक्ष जनरल एसएस नरवणे, रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी, इन्फैंट्री महानिदेशक ले. जनरल एके सामंत्रा उपस्थित थे।
रक्षा क्षेत्र की आत्मनिर्भर की तरफ बढ़ता भारत
रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर उद्योग में बदलने के लिए केंद्र की तरफ से उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की स्थापना की गई है। रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति (डीपीईपीपी) 2020 का प्रारूप तैयार हो चुका है।
घरेलू कंपनियों से खरीद के लिए 2021-22 के रक्षा बजट में से आधुनिकीकरण कोष के तौर पर 64 फीसदी हिस्सा आरक्षित किया गया है। इसके अलावा आत्मनिर्भरता और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 200 रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण की प्रक्त्रिस्या शुरू की गई है।
डीआरडीओ ने दिए रक्षा उद्योग को पंख
डीआरडीओ की तरफ से तकनीकी हस्तांतरण का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ निशुल्क टेक्नोलॉजी हस्तांतरण कर रहा है और 450 से अधिक पेटेंटों के लिए परीक्षण सुविधाएं मुहैया करा रहा है। इससे रक्षा उद्योग न केवल कम समय में टेक्नोलॉजी के लिहाज से सक्षम बना है, बल्कि इससे समय, ऊर्जा और धन की भारी बचत भी हुई है।