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सम्मेलन: राजनाथ सिंह बोले- भारत जलक्षेत्र के वैध अधिकारों की सुरक्षा को प्रतबिद्ध, जानिए और क्या कहा

Wed, 27 Oct 2021 10:42 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजनाथ ने मानव इतिहास में उसकी उत्पत्ति से लेकर संस्कृति समेत विभिन्न आयामों को आकार देने में समुद्री की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की दृष्टि से देखें तो पश्चिम में पुरातात्विक खोजों ने मेसोपोटामिया (आज का इराक), दिलमुन (आज का बहरीन), मगान (आज का ओमान) जैसी सभ्यताओं का प्रचीन नौवहन संपर्क रहा है।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, समुद्री डकैती और जलवायु परिवर्तन को हिंद प्रशांत क्षेत्री की उभरती चुनौतियां बताते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा, भारत अपने जलक्षेत्र के वैध अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हिंद प्रशांत में संसाधनों की प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इसके विभिन्न देशों पर व्यापक प्रभाव पड़ रहे हैं और इनसे निपटने के लिए सहयोगात्मक प्रतिक्रिया की जरूरत है।

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हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत नियम आधारित नौवहन व्यवस्था को बनाये रखते हुए विशिष्ठ आर्थिक क्षेत्र में वैध अधिकारों एवं हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ऐसे में सतत समृद्धि को कायम रखने के लिए आवश्यक है कि इस क्षेत्र की नौवहन क्षमता को प्रभावी, सहयोगी और सहकारी रूप से उपयोग किया जाए। हिंद प्रशांत में चीन की बढ़ती दखल और विस्तारवादी रवैये को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच राजनाथ ने कहा, भारत समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि 1982 के तहत सभी देशाें के अधिकारों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

समुद्र ने मानव इतिहास में विभिन्न आयामों को आकार दिया
राजनाथ ने मानव इतिहास में उसकी उत्पत्ति से लेकर संस्कृति समेत विभिन्न आयामों को आकार देने में समुद्री की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की दृष्टि से देखें तो पश्चिम में पुरातात्विक खोजों ने मेसोपोटामिया (आज का इराक), दिलमुन (आज का बहरीन), मगान (आज का ओमान) जैसी सभ्यताओं का प्रचीन नौवहन संपर्क रहा है।
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उन्होंने कहा कि नौवहन संपर्कों के तहत माल, संस्कृति और सौहार्द के आदान-प्रदान से अतीत में साझी समृद्धि का आधार बना और यह आज तक बना हुआ है। इसी तरह पूर्व में समुद्री संपर्क ने श्रीलंका से दक्षिण पूर्व एशिया और कोरिया तक बौद्ध धर्म को ले जाने में अहम भूमिका निभायी। राजनाथ ने रामायण और महाभारत तथा अयोध्या की भारतीय राजकुमारी का कोरिया के राजकुमार से विवाह का भी उल्लेख किया।

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