दाऊदी बोहरा, शिया मुसलमानों के बीच एक धार्मिक संप्रदाय है। यह पारंपरिक रूप से व्यापारियों और उद्यमियों का एक समुदाय है, जिसके भारत में पांच लाख से अधिक सदस्य हैं और दुनिया भर में 10 लाख से अधिक हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सैयदना (दाऊदी बोहरा समुदाय के नेता) के रूप में मुफद्दल सैफुद्दीन की नियुक्ति को चुनौती देने वाले एक मुकदमे पर बुधवार को सुनवाई पूरी की और फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मुकदमा शुरू में खुजैमा कुतुबुद्दीन ने अपने भाई सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के जनवरी 2014 में 102 वर्ष की आयु में निधन के तुरंत बाद दायर किया था। बुरहानुद्दीन के दूसरे बेटे मुफद्दल सैफुद्दीन ने सैयदना का पदभार संभाला।
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कुतुबुद्दीन ने अपने मुकदमे में अदालत से अपने भतीजे सैफुद्दीन को सैयदना के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि उनके भाई बुरहानुद्दीन ने उन्हें 'मजून' (सेकंड-इन-कमांड) नियुक्त किया था और 10 दिसंबर, 1965 को घोषणा से पहले एक गोपनीय 'नस' (उत्तराधिकार प्रदान करने) के माध्यम से निजी तौर पर उन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था।
हालांकि, 2016 में कुतुबुद्दीन का निधन हो गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने उनके बेटे ताहिर फखरुद्दीन को मुकदमे में वादी के रूप में उनकी जगह लेने की अनुमति दी। फखरुद्दीन ने दावा किया था कि मरने से पहले उनके पिता ने उन्हें इस पद के लिए नियुक्त किया था।
जस्टिस गौतम पटेल की बेंच ने बुधवार को मामले में अंतिम दलीलें सुनने का काम पूरा कर लिया और आदेश के लिए सुरक्षित रख लिया। दाऊदी बोहरा, शिया मुसलमानों के बीच एक धार्मिक संप्रदाय है। यह पारंपरिक रूप से व्यापारियों और उद्यमियों का एक समुदाय है, जिसके भारत में पांच लाख से अधिक सदस्य हैं और दुनिया भर में 10 लाख से अधिक हैं। समुदाय के शीर्ष धार्मिक नेता को दाई-अल-मुतलक के नाम से जाना जाता है।
दाऊदी बोहरा सिद्धांत के अनुसार, एक उत्तराधिकारी को 'ईश्वरीय प्रेरणा' के माध्यम से नियुक्त किया जाता है। समुदाय के किसी भी योग्य सदस्य को 'नस' (उत्तराधिकार प्रदान करना) प्रदान किया जा सकता है और जरूरी नहीं कि वर्तमान दाई के परिवार का ही सदस्य हो।